इनके अलावा मरीज के भर्ती होने के सातवें दिन उसकी ईएसआर दर सबसे ज्यादा देखने को मिली थी। ईएसआर एक रक्त जांच है जिससे यह पता लगाया जाता है कि मरीज को किसी भी प्रकार की क्रोनिक इंफ्लेमेटरी स्थिति है अथवा नहीं।
मेडिसिन विभाग के डॉ. केआर राजेश ने बताया कि 20 वर्षीय छात्रा वुहान से भारत लौटी थी। 23 जनवरी को आने के बाद उसे 27 जनवरी की सुबह गले में दर्द और कफ की शिकायत होने लगी थी।
चूंकि यात्रा पूरी होते वक्त ही छात्रा को जिला सर्विलांस टीम के फोन नंबर उपलब्ध करा दिए गए थे। इसके चलते छात्रा समय पर चिकित्सीय निगरानी में आ गईं। उन्होंने बताया कि वुहान के सीफूड होलसेल मार्केट में वह नहीं गई थीं। वह ट्रेन के जरिए वुहान से कुनमिंग जा रही थीं। उसी बीच उन्होंने ट्रेन में कई लोगों को सांस में तकलीफ की परेशानी के साथ देखा था।
सामान्य अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में जब छात्रा भर्ती हुई उस वक्त उनकी पल्स 82/प्रति मिनट, ब्लडप्रेशर 130/80 एमएमएचजी, तापमान 98.5, ऑक्सीजन सेचुरेशन 96 फीसदी थी। सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं थी। न ही उसे बुखार था।
शुरूआत में छात्रा के शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या एकदम से गिरने लगी थी लेकिन इसके बाद चिकित्सीय निगरानी में जब तीन टीमें 24 घंटे देखभाल करती रहीं तो पांचवें और 20वें दिन में कोशिकाओं में सुधार होने लगा।
डॉक्टरों के अनुसार 3 फरवरी को छात्रा में वायरस के लक्षण गायब हो चुके थे। शुरूआत में उन्हें लगा कि छात्रा शायद अब ठीक है लेकिन जब उसके सैंपल की जांच की तो वायरस वैसा ही सक्रिय था जैसा कि पहले। उनदिनों पुणे एनआईवी लैब में ही वायरस की जांच हो रही थी। पल्मोनॉजिस्ट डॉ. सीपी मुरली ने बताया कि वह वक्त हम सभी के लिए चुनौतियों से भरा था।
नई जानकारी कुछ थी नहीं और पुराने अनुभव एक के बाद एक फेल हो रहे थे। हालांकि धैर्य रखते हुए सख्त निगरानी ने फायदा दिया। अस्पताल में भर्ती होने के 19वें दिन जाकर उस वक्त खुशी लौटी जब छात्रा की पहली निगेटिव रिपोर्ट हाथ लगी। उससे पहले एक, चार, पांच, सात, नौ, 11, 13, 15 और 17वें दिन जांच रिपोर्ट पॉजिटिव ही मिली थी।
पहले मरीज की क्लीनिकल रिपोर्ट
दिन डब्ल्यूबीसी ईएसआर एचजीबी प्लेटलेट्स
पहला 5300 13 10.8 2.8
पांचवां 7300 44 12.2 3.6
14वां 7400 33 12.1 3.0
24वां 8500 80 11.3 3.9