ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के अंतिम दिन प्रदेश सरकार ने हरियाणा सौर ऊर्जा नीति 2016 जारी की। इसका मकसद सौर ऊर्जा क्षमताओं का दोहन कर ग्रीन और क्लीन एनर्जी के उत्पादन को बढ़ावा देना है।
इसके माध्यम से प्रदेश में सौर ऊर्जा निवेशकों को अनुकूल वातावरण प्रदान कराना है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2022 तक हरियाणा की सौर ऊर्जा क्षमता को 4000 मेगावाट तक ले जाना है।
होटल लीला में मंगलवार को मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जहाजरानी मंत्री नितिन गड़करी के मौजूदगी में इस सौर ऊर्जा नीति की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह नीति वर्ष 2022 तक एक लाख मेगावाट सौर ऊर्जा के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वप्न को साकार करने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करेगी।
उन्होंने कहा कि सोलर एनर्जी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए इस नीति के अंतर्गत औद्योगिक स्थिति भूमि उपयोग परिवर्तन की स्वीकृति में छूट बिजली शुल्क जैसे विभिन्न प्रोत्साहन प्रदान किए गए हैं। इसके अलावाए फ्री व्हीलिंग व बैंकिंग फैसिलिटी में छूट की घोषणा की गई।
अक्षय ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव अंकुर गुप्ता ने इस संबंध में नीतिगत पहलों की विस्तृत जानकारी दी। कहा कि इस नीति का उद्देश्य प्रोजेक्ट डेवलपरों से व्यापक निवेश आकर्षित करना है। प्रदेश में सोलर पार्कों की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा यहां नहरों के ऊपर सोलर पावर प्लांट लगाने को प्रोत्साहित किया जाएगा।
इस नीति का उद्देश्य एक मेगावाट से दो मेगावाट तक क्षमता वाली परियोजनाओं के लिए लक्ष्य का 20 प्रतिशत आरक्षित कर छोटे निवेशकों को बढ़ावा देना है। हरियाणा में अपने संयंत्रों की स्थापना करने वाले उद्यमियों को इन परियोजनाओं के लिए दो प्रतिशत का मूल्य अधिमान भी दिया जाएगा। सरकार की ओर से घोषणा की गई कि भवन योजना स्वीकृति प्राधिकारी की अनुमति के बिना ही छत पर सोलर पावर प्लांट स्थापित किए जा सकता है।