तोमर की फर्जी कानून की डिग्री फर्जी है या असली, इस मुद्दे में नया मोड़ आ गया है। बिहार स्थित टीएम भागलपुर विश्वविद्यालय ने अपने जवाब में कहा था कि जो रोल नंबर तोमर ने बार काउंसिल में दिया है उस नाम से किसी तोमर नाम के छात्र को डिग्री नहीं दी गई और तोमर की डिग्री फर्जी है।
उसने यह भी कहा था कि उससे संबंधित किसी भी कॉलेज से तोमर को डिग्री प्रदान नहीं की गई। उधर, हाईकोर्ट में तोमर फर्जी डिग्री मामले में बिहार स्थित मुंगेर के विश्वनाथ सिंह इंस्टीटयूट ऑफ लीगल स्टडीज कॉलेज के प्रधानाचार्य राजेश कुमार ने शपथपत्र सहित पेश जवाब में तोमर की डिग्री को असली बताया है।
यह कॉलेज टीएम भागलपुर विश्वविद्यालय से ही संबंधित है। प्रधानाचार्य ने कहा कि कोई व्यक्ति उनके कॉलेज की प्रतिष्ठा खराब करना चाहता है कि यहां से फर्जी डिग्रियां मिलती हैं।
पुलिस ने शुरू कर दी जांच
उन्होंने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि तोमर ने उनके कॉलेज में एलएलबी के लिए शैक्षणिक सत्र 1994-95 में दाखिला लिया और वर्ष 1995-96 व 1997-98 में बाकायदा परीक्षा भी दी।
उन्होंने शपथपत्र के साथ दाखिला रजिस्टर, परीक्षा संबंधी दस्तावेजों की फोटोकॉपी पेश करते हुए दावा किया कि कॉलेज के साथ-साथ टीएम भागलपुर विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि तोमर ने एलएलबी पार्ट-1, पार्ट-2 व पार्ट-3 की परीक्षा दी है।
दिल्ली के कानून मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर की फर्जी डिग्री मामले में दक्षिण जिला पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
दिल्ली पुलिस की टीम बिहार पहुंची
दक्षिण जिला पुलिस की एक टीम बिहार स्थित विश्वनाथ सिंह विधि संस्थान पहुंची है। बार काउंसिल की शिकायत के बाद दक्षिण जिला पुलिस ने जांच शुरू की है।
दक्षिण जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हौजखास थाने के एक इंस्पेक्टर की देखरेख में एक टीम मुंगेर स्थित विश्वनाथ सिंह विधि संस्थान पहुंची है। पुलिस टीम ने संस्थान में सभी कागजात की बारीकी से जांच की है। नाम, पंजीकरण व टीआर पंजीकरण की गहनता से जांच की गई है।
बताया जा रहा है कि कई घंटे तक बंद कमरे में जांच की जाती रही। इस दौरान किसी को कमरे में आने-जाने की अनुमति नहीं दी गई। पुलिस टीम ने तीन वर्ष के नामांकन के ब्योरे की प्रति संस्थान पदाधिकारियों से अटेस्ट कराकर अपने कब्जे में ली है।