धार्मिक उन्माद की शिकार ज्यादातर महिलाएं व बच्चे ही होते हैं। अटाली गांव में सोमवार को जो कुछ भी हुआ वह इन्हें हिला देने के लिए काफी था।
सिटी थाना परिसर में बनाए गए राहत शिविर में भूखे-प्यासे लोग उस दिन को याद करते हुए कांप उठते हैं। सियासत ने ऐसी चाल चली कि दो समुदायों को आमने-सामने कर दिया।
लोग इतने बेकाबू हो गए कि जिनकी शादी में बढ़-चढ़कर भाग लिया था, उसी के घर में हमला बोल दिया। जन्नत (40) अपने आंसू रोक नहीं पा रही हैं। कहती हैं कि यदि पुलिस वाले रुक जाते तो यह घटना नहीं होती।
घटना को याद कर सिहर उठे लोग
जो लोग उनके हर सुख-दुख में हिस्सा बनते थे वो उस दिन बेकाबू हो गए। धार्मिक उन्माद से भरे युवाओं ने घर के गेट तोड़ दिए।
बच्चों पर पेट्रोल छिड़कने की कोशिश की। मुझे बचाओ, मैं तुम्हारी बहू हूं। आग मत लगाना। बच्चे मर जाएंगे...। ये सब अनुरोध जन्नत ने किए थे। यह बताते हुए वह फूट-फूटकर रोने लगती है। नगीना की आंखें भी उस मंजर को भूल नहीं पा रही हैं।
वह कहती हैं कि उसने अपनी पांच साल की बच्ची को बेड के नीचे छिपाया। लोगों ने उसमें आग लगा दी। जैसे-तैसे पानी डालकर आग बुझाई। हमलावर आसपास के थे, उनके घरों में पहले भी आए थे।
अमन और भाई-चारा हुआ खाक
पता नहीं था, वो ऐसा करेंगे। जिसकी शादी में पूरा गांव शरीक हुआ उसी समीना को गांव आए छह दिन ही बीते थे, लेकिन पड़ोसियों द्वारा किए गए हमले ने उसका विश्वास तोड़ दिया।
समीना कहती है कि वह कई लड़कों को भाई मानती थी। शादी में उन्होंने काम भी खूब किया लेकिन अचानक सबकुछ बदल गया।
गांव में कास्मेटिक की दुकान चलाने वाली मीना का रो-रोकर बुरा हाल है।