-लैंड, लॉ और ऑर्डर को छोड़कर दिल्ली सरकार को हर मुद्दे पर कानून बनाने का हक होगा।
-एलजी को मैकेनिकल तौर पर काम नहीं करना चाहिए और हर मामले में अड़चन पैदा नहीं करनी चाहिए।
-एलजी को फैसले लेने की स्वतंत्र शक्ति नहीं है और वह किसी मामले में अपना विरोध प्रकट कर सकते हैं और उसे राष्ट्रपति तक भी ले जा सकते हैं लेकिन हर मामले को राष्ट्रपति तक नहीं ले जा सकते। जब तक कि वो मामला कोई अपवाद न हो। राष्ट्रपति तक ले जाने से पहले उन्हें अपना विवेक इस्तेमाल कर उसे सुलझाने की कोशिश करनी होगी और जब मामला ज्यादा बड़ा हो तो राष्ट्रपति तक उसे ले जा सकते हैं।
-एलजी को मंत्री परिषद के साथ सौहार्द से काम करना होगा।
-जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सत्ता की असली शक्ति मंत्री परिषद में निहित होगी और एलजी को यह ध्यान रखना होगा कि वो नहीं बल्कि मंत्री परिषद ही सभी फैसले लेंगे।
-अदालत ने कहा कि एलजी को याद रखना चाहिए कि मंत्री परिषद जनता के प्रति जवाबदेह है। ऐसे में एलजी को कोई भी स्वतंत्र फैसला लेने की शक्ति नहीं है।
-सभी रूटीन मामलों को एलजी को बताना या उन तक ले जाना जरूरी नहीं है।