नियमों की अनदेखी कर अरावली की तलहटी में बनाया जा रहा मकान
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अरावली की तलहटी में धड़ल्ले से बनाए जा रहे अवैध मकान क्षेत्र में पर्यावरण और जीव-जंतुओं के अस्तित्व के लिए खतरा बन रहे हैं। अरावली का स्वरूप बिगाड़ने में जुटे लोगों के हौसले प्रशासन की चुप्पी के कारण बुलंद हैं।
अवैध खनन के साथ ही वे अरावली में हरियाली को उजाड़कर अवैध मकान बनाने में जुटे हैं। शहर से शिव मंदिर तक अरावली के बीच से जाने वाली सड़क पर दोनों ओर पेड़-पौधों और प्राकृतिक वनस्पति को उजाड़कर मकान बनाने का काम लगातार चल रहा है।
यह सिलसिला कई वर्षों से चल रहा है। शिव मंदिर तक जाने वाली सड़क के दोनों ओर बड़ी तादाद में अवैध मकान बन चुके हैं। इससे अरावली की सुंदरता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है।
उधर, अरावली की हरियाली को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी वन विभाग की है, लेकिन वह भी इन मकानों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। दूसरे प्रदेशों से यहां आकर बस रहे लोग इलाके की सुरक्षा के लिए कभी भी खतरा बन सकते हैं।
स्थानीय पर्यावरण प्रेमी जुम्मा खां ने कहा कि अरावली का स्वरूप बदला जा रहा है। पेड़-पौधे काफी कम हो चुके हैं। यहां तक कि इसमें बसने वाले वन्य जीव भोजन की तलाश में आबादी का रुख कर रहे हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से अरावली का स्वरूप बदलने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ वन विभाग कार्रवाई कर रहा है। वर्ष 2019 में सात और 2020 में दो लोगों के चालान भरकर मामले कोर्ट में भेजे गए हैं। आदेश मिलने पर जुर्माना भरवाने के बाद सभी अवैध मकानों को ढहाया जाएगा।
-सुनील कुमार जैन, वन रेंजर, फिरोजपुर झिरका
जल्दी ही अरावली की पैमाइश कर सभी अवैध मकानों को हटाया जाएगा। विभाग की ओर से पुन्हाना से शुरुआत कर 120 एकड़ भूमि से मकान हटाए जा चुके हैं।
-वीरेंद्र सिंह, जिला वन अधिकारी