बिसाहड़ा गांव में हुए इकलाख हत्याकांड के बाद गांववालों ने होली नहीं मनाई। मामले में हुई पुलिस की कार्रवाई का विरोध के तौर पर ग्रामीणों ने होली नहीं मानने का एलान किया था।
वहीं अब तक हुई पुलिस की कार्रवाई के विरोध में साठा चौरासी की पंचायत के लिए जनसंपर्क तेज कर दिया है। इसके लिए गांव-गांव जाकर पंचायत को लेकर जनजागरण किया जा रहा है।
दरसअल, 28 सितंबर को जारचा थाना क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में हुए इकलाख हत्याकांड में 19 आरोपियों में से 18 के खिलाफ चार्जशीट दायर हो चुकी है। आरोपियों के परिजनों में अब पुलिस के खिलाफ गुस्सा उजागर होने लगा है। चार्जशीट में में ग्रामीणों की ओर से पुलिस को एक भी गवाह नहीं मिला है। अब केवल वादी के परिवार और पुलिस वाले ही गवाह बनाए गए हैं।
महापंचायत के बाद हुआ था फैसला
दादरी में नहीं मनी होली
- फोटो : अमर उजाला
बीते 21 मार्च को गांव में पंचायत कर सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया। ग्रामीणों ने साठा चौरासी की पंचायत बुलाने और होली नहीं मनाने का एलान किया था। जिसके चलते इस बार गांव में होली नहीं खेली गई। संजय राणा ने बताया कि गांव के युवा, महिला और पुरुषों ने होली नहीं खेलकर अपने आक्रोश और एक जुटता का परिचय दिया है।
साठा चौरासी की पंचायत के लिए बनी समिति
गांव के शिवमंदिर पर तीन दिन पहले ही पंचायत कर ग्रामीणों ने साठा चौरासी में पंचायत कर आगामी आंदोलन की रणनीति बनाने का एलान किया जा चुका है। पंचायत करने के लिए एक सीमित भी बनाई गई है।
ये है साठा चौरासी
दादरी, गुलावटी, धौलाना विधानसभा के 60 गांव में सिसोदिया राजपूत और पिलखुवा, हापुड़, मोदीनगर विधानसभा क्षेत्र के 84 गांव तोमर राजपूत बहुल हैं। इस पूरे राजपूत बहुल क्षेत्र को साठा चौरासी कहा जाता है। बिसाहड़ा कांड के बाद से ही इस क्षेत्र में नाराजगी है। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद इन सभी गांवों के लोगों की महापंचायत बुलाई जा रही है।