-आईआईटी दिल्ली में तीन दिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
आईआईटी दिल्ली में परिवर्तनकारी नेतृत्व में स्टेम विषय पर कार्यशाला हुई। वार्षिक कार्यशाला के तीसरे संस्करण में एससी/एसटी समुदाय के पीएचडी शोधार्थियों को आईआईटी, एनआईटी और दूसरे उच्च शिक्षण संस्थानों में फैकल्टी पदों पर आवेदन के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यशाला केमिकल इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल एंड फाइबर इंजीनियरिंग, मटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग जैसे विषयों पर केंद्रित थी। इसमें देशभर से 150 से ज्यादा उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। आयोजन आईआईटी दिल्ली में एससी/एसटी सेल ने किया। कार्यशाला में अलग-अलग संस्थानों से 50 छात्रों का चयन हुआ। इसमें पिछले साल के दस चयनित उम्मीदवार भी शामिल थे। छात्रों के चयन के लिए सलाहकार समिति की अध्यक्षता आईआईटी दिल्ली एकेडमिक्स डीन प्रोफेसर धन्या सीटी ने की।
आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंगन बनर्जी ने कहा कि कार्यशाला की प्रगति देखकर खुशी हो रही है। सामाजिक रूप से समावेशी शैक्षणिक नेतृत्व बनाने के लिए कार्यशाला मार्गदर्शन पहल शुरू की है जो शिक्षा और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएगी। हमें उम्मीद है कि आने वाले सालों में कई लोग फैकल्टी पदों पर काम करेंगे। कार्यशाला के संयोजक प्रोफेसर यशपाल ने कहा कि अधिकांश प्रतिभागियों ने आत्मविश्वास में महत्वपूर्ण वृद्धि, टॉप रैंक वाले जर्नल्स में प्रकाशन और नए पेटेंट फाइल करने की सूचना दी है। कई लोगों को प्रमुख संस्थानों में पोस्ट डॉक्टरल पद मिले हैं। हमें विश्वास है कि यह लगातार मार्गदर्शन प्रयास स्टेम क्षेत्रों सामाजिक विविधता के अंतर को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।