जैसलमेर में चार छात्रों के हुए सड़क हादसे में जान गवांने के एक दिन बाद ही आईआईटी दिल्ली ने एक बड़ा फैसला लिया है। हादसे में मृत छात्रों में से एक को आईआईटी दिल्ली मरने के बाद भी डिग्री प्रदान करेगा। सूत्रों के मुताबिक आईआईटी ने यह कदम मृत छात्रा के परिजनों की मांग पर लिया है।
सूत्रों के मुताबिक एकेडमिक सीनेट की ओर से ये डिग्री पूरी तरह भावनात्मक जुड़ाव के लिए दी जाएगी। हादसे में मारे गए सभी चार छात्र-छात्राएं बीटेक एमटेक डुअल डिग्री कोर्स के फाइनल ईयर में थे।
बता दें कि रविवार सुबह इनोवा कार का टायर फटने से जैसलमेर की ओर जा रहे आईआईटी दिल्ली के चार छात्रों की मौत हो गई जबकि दो अन्य का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
प्लेसमेंट की खुशी मनाने गए थे
आईआईटी के रजिस्ट्रार राकेश कुमार ने बताया कि हादसे में कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के पल्लव अग्रवाल, दीक्षा गौतम और केमिकल डिपार्टमेंट की अर्चना कुमारी की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि बायो टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के मयंक गोयल ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। ये सभी अपने प्लेसमेंट की खुशियों को सेलिब्रेट करने राजस्थान ट्रिप पर गए थे।
हादसे में बॉयो टेक्नोलॉजी और कंप्यूटर साइंस विभाग के दो अन्य स्टूडेंट शाची मित्तल और जतिन कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के बाद जतिन को डिस्चार्ज कर दिया गया जबकि शाची का अभी भी जोधपुर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। उसे एक एयर एंबुलेंस के जरिए दिल्ली लाने की तैयारी है।
डुअल डिग्री में फंस सकता है पेंच
आईआईटी सूत्रों के मुताबिक कोर्स पूरा न होने के कारण डिग्री देना संभन नहीं है लेकिन इस केस को अपवाद के तौर पर लेकर एकेडमिक सीनेट ही डिग्री देने का फैसला ले सकती है। हालांकि सूत्रों ने बताया कि चारों स्टूडेंट्स का कोर्स लगभग पूरा हो चुका था।
डुअल डिग्री कोर्स होने के चलते अगर उन्हें एमटेक की डिग्री नहीं दी जा सकती तो भी बीटेक डिग्री प्रदान की जा सकती है। लेकिन इसका कोई भी प्रैक्टिकल इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
आईआईटी दिल्ली प्रशासन ने इस मसले पर खुलकर कुछ भी बोलने से इंकार दिया। हालांकि उन्होंने कहा कि इस मामले को एकेडमिक सीनेट में रखा जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि मृत छात्रों के शरीर उनके परिजनों को सौंप दिए गए हैं।