एनसीआर पर भी केंद्रित
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के दिशा-निर्देश पर चल रहे डिस्पर्स्ड सोर्सेज प्रोग्राम (डीएसपी) के तहत अध्ययन किया गया। दिल्ली के अलावा इसमें गुरूग्राम, फरीदाबाद, नोएडा व गाजियाबाद के भी कुछ स्थान शामिल हैं। एनसीआर के शहरों के नतीजे नहीं आए हैं। प्रोग्राम में टूटी-फूटी सड़कों, क्षतिग्रस्त फुटपाथों, बड़े गड्ढों और कई कम अवधि के मसलों जैसे निर्माण और अपशिष्ट मलबा व सड़कों के किनारे जमा होने वाले कचरे से संबंधित मसलों से निपटना होता है।
आठ माह में 2.3 लाख शिकातें, तब जाकर साफ हुई हवा
शोध से पहले एप बनाया गया। इसमें चयनित स्थानों से आठ माह तक 2.3 लाख शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें सबसे ज्यादा दिल्ली में 2.06 लाख, नोएडा में 16,361, गाजियाबाद में 11,351, गुरुग्राम में 2,031 और फरीदाबाद में 1,841 शिकायतें शामिल थीं। स्थानीय निकायों की मदद से इनका समाधान किया गया।
शोधकर्ताओं की राय
शोध इस बात का सबूत देता है कि प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण करने से वायु गुणवत्ता में सार्थक और स्थायी रूप से सुधार संभव है। इस लिहाज से व्यापक रूप से नीतिगत बदलावों और वायु गुणवत्ता के प्रबंधन के लिए देशभर के शहरों की ओर से इस प्रोग्राम को अपनाया जाना चाहिए। - डॉ. सोफिया राव, शोधार्थी, आईआईटी दिल्ली
दिल्ली के प्रदूषण में पीएम2.5 का बढ़ता स्तर चिंताजनक है। इसके लिए एमसीडी ने बतौर नोडल एजेंसी सहयोग दिया। आने वाले दिनों में दिल्ली के वातावरण के लिए अधिक व्यापक व स्थायी प्रभाव पैदा कर सकेंगे। - तारिक थॉमस, अतिरिक्त आयुक्त, एमसीडी
यह अत्याधुनिक कार्यक्रम है। इसके जरिये क्षेत्रीय स्तर पर प्रदूषण से निपटा जा सकता है। इसे देश के अन्य शहरों में भी नेशनल क्लीन एयर एक्शन प्लान (एनसीएपी) के तहत अपनाया जा सकता है। - मोहित बोइत्रा, सीईओ, शोध में शामिल निजी संस्था ए-पीएजी