विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग ने आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर अश्विनी कुमार को एंटीवायरल कोटिंग युक्त मास्क बनाने का जिम्मा सौंपा है। इसे अश्विनी कुमार ने ही विकसित किया है। इसे कोरोना से लड़ने के लिए ट्रिपल लेयर और ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकेगा। इस विशेष कोटिंग को बनाने में चांदी के नैनोकण का इस्तेमाल किया गया है, जो त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
इसे एसएमआईए रिसर्च लैब तथा आईआईटी दिल्ल ने विकसित कर एन-9 ब्लू नैनोसिल्वर नाम दिया है। प्रोफेसर ने बताया कि विशेष कोटिंग के चलते कोरोना का वायरस अगर मास्क के ऊपर आता भी है तो इसके प्रभाव में आते ही तुरंत नष्ट हो जाएगा। इससे संक्रमण का असर मास्क धारण करने वाले पर नहीं करेगा। इससे मास्क ज्यादा टिकाऊ होगा। उन्होंने कहा कि इसका बैक्टीरियल टेस्ट हो चुका है। एंटी वायरल जांच का काम चल रहा है।
इसके अलावा कोरोना वायरस से रक्षा के लिए पीपीई किट पर इसकी कोटिंग की जाएगी। इसके जून के अंतिम सप्ताह तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है। यह पीपीई समेत अन्य उपकरणों पर भी असरदार साबित होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण का उपचार करने वाले डॉक्टरों और नर्सों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं होगा।