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केंद्र के दबाव में IIT निदेशक का इस्तीफा!

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भारतीय प्रौद्यौगिकी संस्थान दिल्ली में इस समय हड़कंप मचा हुआ है। आईआईटी निदेशक रघुनाथ के शेवागांवकर ने अचानक अपने कार्यकाल से दो साल पहले ही इस्तीफा दे दिया है। अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक शेवागांवकर ने सरकार के दबाव में आकर अपने पद से इस्तीफा दिया है।
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अखबार के मुताबिक शेवागांवकर पर दो मामलों को लेकर दबाव डाला जा रहा था। पहला मामला दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को लेकर है। जानकारी के मुताबिक सचिन आईआईटी दिल्ली में अपनी एक क्रिकेट एकेडमी खोलना चाह रहे थे। इस पर सरकार आईआईटी पर सचिन को जमीन देने का दबाव डाल रही थी।

दूसरा मामला भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी को लेकर है। अखबार के अनुसार सरकार आईआईटी पर सुब्रमण्यम स्वामी को उनकी बकाया वेतनमान राशि चुकाने का दवाब बढ़ा रही थी। मामले में आईआईटी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने निदेशक के इस्तीफे की पुष्टि भी की है।
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मेरा हक है, मैं लेकर रहूंगाः स्वामी

आईआईटी निदेशक आरके शेवागांवकर के इस्तीफे के बाद उपजा विवाद उस गहराता जा रहा है। उनकी इस्तीफे दो वजहों में एक वजह भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वमी के बकाया वेतनमान पर सबसे ज्यादा हो-हल्ला मच रहा है।

दरअसल, स्वामी सन् 1972 से सन् 1991 तक (करीब 19 साल) दिल्ली आईआईटी में प्रोफेसर के तौर पर नियुक्त रहे हैं। स्वामी के मुताबिक उन्हें इस कार्यकाल का भुगतान नहीं किया गया है। मामले को लेकर स्वामी कोर्ट भी जा जुके हैं।

स्वामी का कहना है कि यह उनकी मेहनत के पैसे हैं, इनपर उनका हक है। वे अपने इस पैसे को लेकर रहेंगे। जबकि इस मांग को मानव संसाधन मंत्रालय और आईआईटी दोनों ही नकार चुके हैं। आईआईटी के मुताबिक स्वामी ने वेतनमान के लिए जरूरी कागजात संस्थान को नहीं सौंपे हैं।

वहीं, स्वामी के मुताबिक उन्होंने सारे कागजात कोर्ट को सौंप दिए हैं। उनका भुगतान सरकार करेगी। एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने शेवागांवकर पर घपलेबाजी का आरोप भी लगाया।

सचिन ने एकेडमी बनाने की खबरों का खंडन किया

आईआईटी निदेशक के इस्तीफे की एक अन्य वजह क्रिकेटर सचिन को जमीन न उपलब्‍ध कराने का है। जानकारी के मुताबिक सचिन आईआईटी में क्रिकेट एकेडमी चलाने के इच्छुक हैं। लेकिन आईआईटी निदेशक इसके खिलाफ हैं। उनके मुताबिक आईआईटी में क्रिकेट एकेडमी हानिकारक है।

इसलिए आईआईटी उन्हें क्रिकेट एकेडमी खोलने के लिए जमीन नहीं दे रही है। टीओआई की खबर के मुताबिक अब सरकार आईआईटी पर सचिन को जमीन देने के लिए दबाव बना रही है।

लेकिन खुद सचिन ने इस पूरे मसले को सिरे खारिज कर दिया है। सचिन के मुताबिक उनकी ऐसी कोई योजना नहीं हैं। बाद में खुद टीओआई ने खुद खबर में सचिन के नाम के लिए माफी मांग ली। हालांकि फुटबाल स्टार बाइचुंग भूटिया वहां पिछले तीन महीने से फुटबाल एकेडमी चला रहे हैं।
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मंत्रालय ने मामले को दिया नया मोड़

दिल्ली आईआईटी के एलुमनाई एसोसिएशन के सचिव सीके जैन के मुताबिक निदेशक के इस्तीफे में केंद्र सरकार की भूमिका है। उन्होंने कहा कि सरकार को आईआईटी जैसे संस्‍थानों के मामले में दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए। इससे माहौल काफी खराब होता है।

मामले पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का कहना है कि केंद्र सरकार लगातार स्वायत्त संस्‍‌थाओं की स्वतंत्रता को बाधित कर रही। उन्होंने कहा कि उनकी आईआईटी निदेशक से बात हुई है, उन्होंने भाजपा सरकार के चलते ही इस्तीफा दिया है। मामले में कांग्रेस नेता जेपी अग्रवाल ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

उधर, मानव संसाधन व विकास मंत्रालय ने मामले नया मोड़ दिया है। मंत्रालय के मुताबिक शेवागांवकर ने सरकार के दबाव के चलते इस्तीफा नहीं दिया है। बल्कि उन्होंने मारिशस संबंधी एक घोटाले का दबाव है। उन्होंने उसी के दबाव में इस्तीफा दिया है।
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