कोरोना संक्रमित रोगियों के उपचार के दौरान संक्रमण से बचने के लिए डॉक्टर और नर्स पीपीई किट्स पहनते हैं। लेकिन अब तक बाजार में उपलब्ध पीपीई किट्स के नीचे प्लास्टिक की एक विशेष लेयर होती है, जिसके कारण इसे पहनने वाले डॉक्टरों को काफी गर्मी लगती है। वैज्ञानिकों ने स्वास्थ्यकर्मियों की इस समस्या का हल निकाल लिया है।
अब पीपीई किट्स पहनने के दौरान उन्हें ज्यादा गर्मी और उमस का सामना नहीं करना पड़ेगा क्योंकि अब पीपीई किट्स एक विशेष कपड़े के बनाए जा सकेंगे। इस कपड़े से बनी पीपीई किट्स में हवा गुजर सकेगी जिससे स्वास्थ्यकर्मियों को ज्यादा गर्मी का एहसास नहीं होगा।
अब तक के पीपीई किट्स को वायरस को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जबकि यह पीपीई किट 99 फीसदी तक बैक्टीरिया को भी रोकने में सक्षम बताई गई है।
इस विशेष कपड़े को डिजाइन करने वाले आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिक एसएम इश्तियाक ने अमर उजाला डॉट कॉम को बताया कि यह पोलिस्टर मिश्रित एक विशेष प्रकार का कपड़ा है जिसके अंदर से हवा बाहर की तरफ पास कर सकेगी, लेकिन अगर इस कपड़े के ऊपर किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ जैसे थूक या रक्त के कण (कोरोना संक्रमण में इनकी अहम भूमिका) पड़ेंगे तो वे इस पर टिक नहीं सकेंगे और फिसलकर नीचे गिर जाएंगे। इस प्रकार इसे पहनने वाले स्वास्थ्यकर्मी तरल माध्यमों से होने वाले किसी भी संक्रमण से बच सकेंगे।
कपड़े की तरह पहन सकेंगे
वैज्ञानिक एसएम इश्तियाक ने बताया कि यह पीपीई किट प्लास्टिक की नहीं, बल्कि एक कपड़े की बनी है, इसलिए इसे सामान्य कपड़ों की भांति पहना जा सकेगा। इसे पहनने में काफी सॉफ्ट अनुभव होगा। इसमें सिर को ढकने की कैप और जूते तक शामिल हैं। लोगों के अलग-अलग साइज को ध्यान में रखते हुए इसे चार अलग-अलग साइज में बनाया गया है।
एक किट तीन बार हो सकेगी इस्तेमाल
यह विशेष पीपीई किट तीन बार तक इस्तेमाल की जा सकेगी। कपड़े की बनी होने के कारण इसे विशेष रसायनों के जरिए धुलकर संक्रमण मुक्त किया जा सकेगा। अब तक बाजार में उपलब्ध किट लगभग एक हजार रुपये के आसपास की आती हैं, लेकिन इसे तीन बार इस्तेमाल करने के कारण इसकी कीमत एक तिहाई रह जाएगी।
यह पूरी तैयार किट का वजन लगभग 300 ग्राम है जबकि इस समय बाजार में उपलब्ध किट का वजन 400 से 500 ग्राम तक है। इस प्रकार यह इस्तेमाल के दौरान भी हल्का रहेगा। वैज्ञानिकों का दावा है कि इसे पहनने वाले स्वास्थ्यकर्मी आराम महसूस करेंगे।