केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने दीक्षांत समारोह में कहा, मैं भी छात्र बनकर आया, इनके काम की सराहना की जानी चाहिए। हनुमान चालीसा पर उठे विवाद पर कहा, हमारे देश में सहिष्णुता के बारे में बोला और लिखा जाता है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) के प्रोफेसर भगवान हनुमान की तरह हैं। जिन्हें अपनी शक्ति का आभास तक नहीं था। यह बात केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इग्नू के 35वें दीक्षांत समारोह के मौके पर कही। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के काम की सराहना की जानी चाहिए।
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दिल्ली स्थित इग्नू मुख्यालय में दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया था। समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि मैं यहां छात्र के रूप में आया हूं। छात्र एक मानसिक अवस्था है। यह एक सोच हैं। आप कहीं भी हों, कोई भी हों, अगर सीखना चाहते हैं तो छात्र हैं। उन्होंने कहा कि वे छात्र नेता रहे हैं और अब शिक्षा मंत्री बन गये हैं।
'हनुमान चालीसा' को लेकर हाल में उठे विवादों पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे देश में सहिष्णुता के बारे में बोला जाता है और लिखा जाता है। कई बार हमें विदेशों से भी इस बारे में सलाह मिलती है, लेकिन मुझे लगता है कि यह हमारे लोकतंत्र में अंतर्निहित है। उन्होंने कहा कि इग्नू के सभी प्रोफेसर और देशभर में इसके क्षेत्रीय केंद्रों से जुड़े अध्यापकों में हनुमान जी के गुण हैं।
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भगवान हनुमान जी को समाज की सेवा करने के लिए और आदिवासियों की आवाज बनने के लिए जाना जाता है। उन्हें आभास ही नहीं था कि उनके पास किस तरह की शक्तियां थीं। कई बार, उन्हें उनकी अपार शक्तियों के बारे में बताया जाता था। आप हनुमान हैं। आपको पता नहीं चलता है कि आपने क्या किया।
क्षेत्रीय कार्यालयों में भी डिग्री दी गईं
दीक्षांत समारोह में कुल 2,91,588 छात्रों को डिग्री और डिप्लोमा देकर सम्मानित किया गया। दीक्षांत समारोह में इतनी बड़ी संख्या में डिग्री और डिप्लोमा देने की यह सर्वाधिक संख्या है। दीक्षांत समारोह का सीधा प्रसारण इग्नू के सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में भी किया गया था। क्षेत्रीय कार्यालयों में भी छात्रों को डिग्री दी गईं।