- ग्लोबल चुनौतियों से निपटने की दिशा में अहम कदम, किसी भी विषय से स्नातक विद्यार्थी ले सकते हैं प्रवेश
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने भविष्य के क्लाइमेट लीडर्स को तैयार करने के लिए जलवायु परिवर्तन में एमएससी प्रोग्राम शुरू किया है। इग्नू का दावा है कि वह भारत का पहला विश्वविद्यालय है, जहां मास्टर ऑफ साइंस यानी एमएससी में क्लाइमेट चेंज प्रोग्राम शुरू किया गया है। विश्वविद्यालय इसे समय की सबसे जरूरी ग्लोबल चुनौतियों में से एक से निपटने की दिशा में अहम कदम माना है। विश्वविद्यालय के अनुसार, क्लाइमेट चेंज दुनिया भर में इकोसिस्टम, अर्थव्यवस्थाओं और इंसानी भलाई पर तेजी से असर डाल रहा है। इसका मकसद सीखने वालों को क्लाइमेट साइंस, क्लाइमेट रिस्क, अनुकूलन और शमन रणनीतियों, पर्यावरण गवर्नेंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की पूरी समझ देना है।
इग्नू से हासिल जानकारी के मुताबिक, दो वर्षीय इस कार्यक्रम में जलवायु विज्ञान, जलवायु जोखिम, अनुकूलन एवं शमन रणनीतियां, पर्यावरणीय प्रशासन, सतत विकास, जल संसाधन, ऊर्जा प्रणालियां, कृषि, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जैव विविधता संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, चक्रीय अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन और पर्यावरण कानून जैसे विषय शामिल किए गए हैं।इस प्रोग्राम का संचालन डॉ. वी. वेंकटरामनन और प्रो. शची शाह कर रहे हैं, जिनके पास पर्यावरण, सस्टेनेबिलिटी और क्लाइमेट चेंज स्टडीज के क्षेत्रों में व्यापक एकेडमिक और रिसर्च अनुभव है।
प्रवेश की प्रक्रिया
इस पाठ्यक्रम में किसी भी विषय से स्नातक कर चुके विद्यार्थी प्रवेश ले सकते हैं। यह कोर्स 80 क्रेडिट का है। पहले वर्ष की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी करने वाले विद्यार्थियों को पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन क्लाइमेट चेंज (पीजीडीसीसीसी) प्राप्त करने का विकल्प भी मिलेगा। इस कोर्स की फीस 8000 रुपए है इसमें नामांकन और डेवलेपमेंट फीस अतिरिक्त देना है। इस कोर्स की भाषा अंग्रेजी है। वहीं, इग्नू ने विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों के स्नातकों, नीति निर्माताओं, शिक्षकों, पेशेवरों और पर्यावरण के प्रति रुचि रखने वाले लोगों से इस कार्यक्रम में प्रवेश लेने की अपील की है।