लाखों की कमाई, सुरक्षा के नियमों की उड़ रही धज्जियां
मुखर्जी नगर की संकरी गलियों में बिना किताब वाली लाइब्रेरी का बसेरा है। इन छोटे-छोटे कमरों में 20-25 मेज और कुर्सी लगाकर छात्रों से लाइब्रेरी के नाम पर फीस वसूलते हैं। यहां के हालत इतने खराब हैं कि सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नजर नहीं आते हैं। इन रूम्स में न ही खिड़कियां हैं और न ही अग्निश्मन यंत्र हैं। यहां तक कि आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए भी कोई दूसरा रास्ता नहीं है। बता दें मुखर्जी नगर की एक बिल्डिंग में 15 जून 2023 को आग लगने से छात्रों की जान जोखिम में पड़ गई थी। ऐसी घटनाएं होने के बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहां अब भी कई कोचिंग संस्थान और रीडिंग रूम्स के पास फायर एनओसी तक नहीं है। अगर कहीं अग्निशमन उपकरण लगे भी हैं, तो वह खराब अवस्था में नजर आए। किसी पर जंग लगा हुआ है, तो किसी उपकरण की तिथि भी एक्सपायर नजर आ रही है।
छात्रों की मजबूरी बनी, वसूली की वजह
यहां पढ़ने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें दो से तीन छात्रों के साथ कमरा साझा करते हैं। ऐसे में पढ़ाई पर फोकस करने के लिए इन्हें यहां आना पड़ता है। इसके अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इसी का फायदा उठाकर यहां पर ऐसे रीडिंग रूम्स का निर्माण बढ़ता ही जा रहा है। यहां स्थित वर्धमान प्लाजा में छोटे कमरों में मेज और कुर्सी लगाकर छात्रों से मोटी रकम वसूली जाती है। सीट पक्की करने के लिए उनसे अलग से फीस ली जाती है। लॉकर के लिए अलग से फीस देनी होती है। ऐसे में दूसरे राज्यों से आए अभ्यर्थियों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पांच वर्षों से यहां परीक्षा की तैयार कर रहे उत्तराखंड से आए अभ्यर्थी महेंद्र ने बताया कि वह जिस कमरे में रहते हैं, वह काफी छोटा है। उसमें केवल दो ही व्यक्ति रह सकते हैं। जिससे कि तीनों पाली बदल-बदलकर रहते हैं। उन्होंने बताया कि इन दिनों वह रात में रीडिंग रूम में ही पढ़ते हैं और वहीं, कुर्सी पर सो जाते हैं।
घंटे के हिसाब से ली जाती है फीस
रीडिंग रूम्स में पढ़ाई करने आई छात्रा कृति मिश्रा ने कहा कि यहां पर घंटों के हिसाब से रीडिंग रूम्स संचालक रुपये वसूलते हैं। एक घंटे से लेकर 24 घंटे तक की फीस अलग है। अगर रात में पढ़ाई करनी हो तो उसके लिए अलग से फीस चुकानी पड़ती है। मुखर्जी नगर में कुछ लाइब्रेरियों में फिंगर प्रिंट की भी व्यवस्था है। इसके जरिए छात्रों की एंट्री होती है। छात्रों ने बताया कि कोई दूसरा व्यक्ति यहां पर प्रवेश न करे इसलिए मेन गेट पर फिंगर प्रिंट लगाया गया है। लाइब्रेरी का ये बिजनेस काफी प्रचलन में चल रहा है।
रात में लड़कियों का प्रवेश वर्जित
यहां अधिकतर रीडिंग रूम्स में रात के समय लड़कियों का प्रवेश वर्जित है। मुखर्जी नगर में बत्रा सिनेमा के पास से एक रीडिंग रूम में पढ़ने वाली अभ्यर्थी रेशमा ने बताया कि वह शाम के समय यहां आती हैं। वह कहती हैं कि अगर रात के समय उन्हें यहां पढ़ने के लिए मिलता तो वह सुबह नौकरी पर जा सकती थी। रेशमा मायूस होकर कहती हैं कि इससे उनके परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। नेहरू नगर में रीडिंग रूम में यूपीएससी की तैयारी करने आए रोशन कुमार ने कहा कि वह बिहार से हैं और एक साल पहले यहां आए थे। यहां कमरे इतने महंगे और छोटे हैं कि लाइब्रेरी में पढ़ना मजबूरी हो गई है। मकान का किराया और यहां की फीस चुकाना उनके लिए मुश्किल हो जाता है। छह घंटे के लिए महीने का 900 रुपये देने पड़ते हैं और सीट रिजर्व कराने के लिए एक हजार तक की फीस देनी पड़ती है। जितने घंटे बढ़ेंगे उतनी ही फीस भी बढ़ती जाएगी। वहीं, श्रुति झा ने बताया कि लाइब्रेरी में इंटरनेट व बिजली का प्रबंध तो है, लेकिन किताबों की कोई व्यवस्था नहीं है। वह कहती हैं कि उन्होंने पहले बार बिना किताबों के लाइब्रेरी देखी है।
24 घंटे खुले रीडिंग रूम्स, दिन का चार्ज ज्यादा-रात का कम
कुछ रीडिंग रूम्स 24 घंटे खुले रहते हैं, तो कुछ रात के 11-12 बजे तक बंद हो जाते हैं। 24 घंटे के लिए इन रीडिंग रूम्स की फीस 2400 से चार हजार रुपये तक है। 12 घंटे के लिए दो हजार है, जबकि 8 घंटे के लिए 1500 रुपये है। रात में नौ बजे से सुबह छह बजे यहां बैठकर पढ़ने के लिए फीस कम है, यह करीब 600 रुपये है। एक महीने, तीन महीने, छह महीने और वार्षिक मेंबरशिप भी है। रीडिंग रूम्स चलाने वाले संचालक कोचिंग सेंटरों की तरह डिस्काउंट देते हैं। दो, तीन और छह महीने की एडवांस बुकिंग करा ली, तो उन्हें स्पेशल डिस्काउंट मिलते हैं। कुछ तो प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करने पर भी छूट देते हैं।