टर्मिनल-1 को अभी से तीन गुना बड़े क्षेत्र में विकास करने की योजना है। यहां से सालाना दो से चार करोड़ यात्री सफर कर सकेंगे। अलग-अलग आगमन और प्रस्थान टर्मिनल के बदले अब एक ही छत के नीचे नया और एकीकृत टर्मिनल बनाया जाएगा। बैगेज हैंडलिंग और सुरक्षा जांच प्रणालियों को बेहतर किया जाएगा।
मौजूदा 64.140 वर्गमीटर क्षेत्रफल से बढ़कर 1,92,985 वर्गमीटर में यह टर्मिनल तैयार होगा। एकीकृत टर्मिनल में चेहरे की पहचान, ऑटोमेटिक ट्रे, सेल्फ बैगेज ड्राप सिस्टम, रैपिड एक्जिट वाली तकनीक का उपयोग होगा। इससे यात्रियों को लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा और समय की बचत होगी। प्रति घंटा 5-6 हजार सामान की स्क्रीनिंग होगी। 35 बोर्डिंग स्टेशन होगा।
टर्मिनल-3 को और बेहतर किया जाएगा
एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 में भी बदलाव किया जाएगा। जून 2021 तक बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इंटरनेशनल ट्रांसफर एरिया बड़ा किया जाएगा। बैगेज हैंडलिंग सिस्टम बेहतर करने के साथ आईटी सिस्टम अपग्रेड किया जाएगा। एरोसिटी मेट्रो स्टेशन जंक्शन पर एक फ्लाईओवर बनाया जाएगा। इससे टर्मिनल-1 से टर्मिनल-3 तक जाने की राह आसान होगी।
सड़क 8 लेन के बजाय 12 लेन की बनाई जाएगी। रेडिसन रोड के 1 किलोमीटर के खंड को एक अंडरपास के साथ नए ढंग से बनाया जाएगा। टर्मिनल को डिपार्चर रैंप से जोड़ा जाएगा। कार्गो मूवमेंट के लिए एनएच-8 के करीब फ्लाईओवर के साथ एक डेडिकेटेड गलियारा बनाया जाएगा, जो यात्री वाहनों को भारी वाहनों की आवाजाही से अलग करेगा। वहीं, दो एलिवेटिड ईस्टर्न क्रास टैक्सी-वे बनाया जाएगा। इससे वाहन आसानी से टर्मिनल पर आवाजाही कर सकेंगे।
चौथा रनवे बनेगा
हवाई जहाजों के टैक्सीइंग टाइम में कमी लाने के लिए नया रनवे का निर्माण किया जाएगा। रनवे संख्या 11/29 के समानांतर 4400 मीटर लंबा चौथा रनवे का निर्माण किया जाएगा। इससे यह फायदा होगा कि विमानों को कतार में उड़ान के लिए लगने की जरूरत नहीं होगी। इसी तरह रनवे पर जगह नहीं मिलने के कारण विमानों को हवा में समय गुजारने की जरूरत नहीं होगी।
मास्टर प्लान के अनुसार दिल्ली एयरपोर्ट को पेपरलेस किया जाएगा। फेशियल रिकॉग्निशन सुविधा होगी। एयरपोर्ट पर एंट्री और बोर्डिंग वाली प्रक्रिया में समय की बचत होगी। आपके चेहरे को स्कैन करके आपकी पहचान की जाएगी और एयरपोर्ट पर दाखिल होने से लेकर बोर्डिंग तक किसी पेपर या बोर्डिंग पास की जरूरत नहीं होगी।
अपने आधार कार्ड, पासपोर्ट या किसी मान्यता प्राप्त पहचान पत्र के साथ अपने फेशियल रिकॉग्निशन को एक बार सरकारी डेटाबेस में फीड करना होगा, ताकि एयरपोर्ट पर सिर्फ आपका चेहरा स्कैन किया जाए और पूरा डाटा मिल जाए।
जीएमआर के ग्रुप उप प्रबंध निर्देशक आई प्रभाकर राव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि हवाई यात्रा करने वालों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि को देखते हुए दिल्ली एयरपोर्ट का विस्तार करके इसे बेहतर यात्री अनुभव के साथ भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे मौजूदा एयरलाइंस को बेहतर सेवाएं देने के साथ ही एयरलाइंस को अपनी सेवाएं आरंभ करने के लिए पर्याप्त स्थान भी उपलब्ध होगा।