पानी के मामले में राजधानी पूरी तरह पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है। उसके पास एक एमजीडी पानी का स्रोत नहीं है। तमाम जल शोधक संयंत्रों में उत्तर प्रदेश और हरियाणा से मिलने वाले कच्चे पानी को साफ करके लोगों के घरों में पहुंचाया जाता है।
एसवाईएल विवाद में पंजाब के किसानों की पैरवी करने पर केजरीवाल को हरियाणा से पानी मिलना बंद हो जाए तो करीब 75 प्रतिशत राजधानी निवासी पानी के लिए तरस जाएंगे। क्योंकि, दिल्ली को करीब 75 प्रतिशत कच्चा पानी हरियाणा से ही मिलता है।
जाटों के आंदोलन में ऐसी ही स्थिति फिलहाल में बन गई थी। यह पानी उसे यमुना नदी और मुनक नहर के माध्यम से प्राप्त होता है, जबकि 25 प्रतिशत पानी गंग नहर के तहत उत्तराखंड देता है।