साइट-4 की अलाना फैक्ट्री में काम करने वाले 350 लोगों की किस्मत ही है कि जिस वॉल्व से गैस लीक हुई, वह फटा नहीं। नहीं तो हादसा जानलेवा भी हो सकता था।
जानकारों की मानें तो फैक्ट्री के रेफ्रीजरेशन और पैकेजिंग डिपार्टमेंट में अमोनिया गैस रिसने से पाइपलाइन में मौजूद प्रेशर से वॉल्व फट भी सकता था।
अगर वॉल्व फटता तो सैकड़ों कर्मचारियों की जान चली जाती। जिस हॉल में गैस का रिसाव हुआ, वहां 123 लोग काम कर रहे थे।
गैस की चपेट में आई डॉली ने बताया कि लंच ब्रेक के बाद हॉल में लौटकर कटिंग और पैकिंग शुरू ही की थी कि अचानक वॉल्व खुलते ही हल्का धमाका हुआ और तेज प्रेशर के साथ गैस रिसने लगी। इससे भगदड़ मच गई। फिर जब आंख खुली तो वह अस्पताल में थी।
फैक्ट्री के जीएम अयाज सिद्दीकी ने भी माना कि वॉल्व पूरी तरह बंद नहीं था। जांच कराई जा रही है कि इसमें किस कर्मचारी ने लापरवाही बरती है।
उधर, सिटी मजिस्ट्रेट कपिल सिंह ने बताया कि वॉल्व बंद नहीं होने से साफ है कि प्रबंधन की ओर से लापरवाही की गई है।
जांच की जा रही है कि अमोनिया की पाइपलाइन के वॉल्व का काम जिस व्यक्ति के पास था, उसे तकनीकी जानकारी थी या नहीं। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस को भी नहीं दी गई सूचना
प्रबंधन की लापरवाही का इसी से पता चलता है कि प्रबंधन की ओर से पुलिस को कोई सूचना नहीं दी गई। सूर्यनगर चौकी के कुछ सिपाही कौशिक नर्सिंग होम के सामने ही गश्त कर रहे थे।
इस दौरान उन्होंने युवतियों को अस्पताल आते देखा, जिसके बाद उन्होंने वायरलेस पर यह सूचना प्रसारित की। एसएचओ राशिद अली ने बताया कि फैक्ट्री रेलवे रोड चौकी के अंतर्गत आती है, जो फैक्ट्री से चंद कदमों की दूरी पर है।
फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से वहां हादसे की सूचना तक नहीं दी गई। हालांकि हमने प्रबंधन से जुड़े कुछ अफसरों से पूछताछ की है। शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
गैस का रिसाव और छोटे से अस्पताल में इलाज
सिर्फ फैक्ट्री ही नहीं घटना के बाद भी प्रबंधन की लापरवाही सामने आई। गैस की चपेट में आए कर्मचारियों को बड़े अस्पताल में भर्ती कराने के बजाए बृज विहार के एक छोटे से नर्सिंग होम में लाया गया।
इसी से पता चलता है कि फैक्ट्री प्रबंधन घटना को पूरी तरह से दबाना चाहता था। सिटी मजिस्ट्रेट कपिल सिंह और एडिशनल सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार अस्पताल पहुंचे तो प्रबंधन को जमकर लताड़ लगाई।
उन्होंने तुरंत पांच एंबुलेंस मंगवाकर सभी पीड़ितों को जिला अस्पताल शिफ्ट कराया। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि जहां कर्मचारियों को लाया गया था, वह बेहद छोटा अस्पताल है। हालांकि चिकित्सकों ने बेहतर प्राथमिक उपचार दिया है। मगर जगह कम होने के चलते सभी को एमएमजी शिफ्ट कराया गया है।
लगातार मामले को दबाने में जुटा रहा प्रबंधन
प्रबंधन के लोग लगातार मामले को दबाने में जुटे रहे। यहां तक की अस्पताल पहुंचे प्रबंधन के एक अधिकारी ने तो इसे बेहद छोटा हादसा बताया और मीडिया को इसे ज्यादा हाईलाइट नहीं करने की नसीहत दे डाली। हालांकि मीडिया ने जब उससे लापरवाही के बारे में पूछा तो वह चलता बना।
ओड़िसा और तमिलनाडू से आकर यहां करती हैं नौकरी
गैस की चपेट में आने वाली ज्यादातर युवतियां ओड़िसा, असम और तमिलनाडू की हैं। युवतियों ने बताया कि माता-पिता के गरीब होने के चलते वे यहां आकर काम कर रही हैं। फैक्ट्री के पास ही कमरा लेकर रहती हैं।
इनमें से कई लड़कियां नाबालिग दिखाई दीं। मगर जब उनसे उम्र पूछी गई तो सभी ने अपनी उम्र 18-22 साल के बीच बताई। सभी ने बताया कि घटना के दौरान भगदड़ में उन्हें पता भी नहीं चला कि कब वे बेहोश हो गईं।
62 देशों में मीट एक्सपोर्ट और सुरक्षा इंतजाम जीरो
अलाना ग्रुप की जिस फैक्ट्री में गैस रिसाव हुआ, वहां से 62 देशों को मीट की सप्लाई होती है। अलाना ग्रुप चॉकलेट और कई अन्य खाद्य सामग्री का निर्माण करता है।
आईएसओ और आईएसआई जैसे कई ट्रेडमार्क होने के बाद भी यहां सुरक्षा के इंतजाम नदारद दिखे। गैस रिसाव के दौरान कर्मचारियों के लिए फैक्ट्री में फर्स्ट एड तक नहीं था। ऐसे में अस्पताल पहुंचने तक कुछ कर्मचारियों की तबियत ज्यादा बिगड़ गई।
ये आए गैस रिसाव की चपेट में
युवतियां: डॉली, साएरा, शबनूर, अंतरा, मौलिका, शामला, आयशा, रिहाना, सुल्ताना, हिना, रोशनी, संतो, अमीना, सोनी, अफरोज, ताहिरा, सराउनी, खुशनशीं, गुड़िया, रोशनी, नासरीन, रानी, शशिवती, रानी, सिरजाना और रेखा।
युवक: जुबैर और राजेश