वाह री राजनीति। जो न करा दे वह कम है। पंचायत चुनाव में देखकर तो यही लगता है कि कुर्सी पाने को कितना भी गिरा जा सकता है।
तभी तो बहू के माध्यम से राजनीति चमकाने के लिए पढ़ी-लिखी बहू मिलने पर दहेज न लेने का प्रलोभन दिया जा रहा है। गिरावट तो तब देखने को मिल रही है जब कुछ लोग बहू के चुनाव न जीतने पर तलाक की शर्त रख रहे हैं।
मेवात में पंचायत चुनाव में शैक्षणिक योग्यता निर्धारित किए जाने से मेवात में पांच साल से चुनाव लड़ने की इच्छा पाले बैठे लोग मायूस हो गए। ऐसे में पढ़ी-लिखी बहू ही एक उम्मीद नजर आ रही है।
इसलिए ऐसी बहू मिलने पर शादी में दहेज न लेने का प्रलोभन दिया जा रहा है। ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके पंच-सरपंच बनने की राह में शैक्षणिक योग्यता रुकावट बन गई है।