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मर्यादा पुरुषोत्तम ने तोड़ा धनुष तो क्रोधित हुए परशुराम

Thu, 15 Oct 2015 07:22 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद
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श्री श्रद्धा रामलीला कमेटी सेक्टर-15 द्वारा सामुदायिक भवन में चल रहे रामलीला मंचन के चौथे दिन सीता स्वयंवर, लक्ष्मण-जनक व परशुराम संवाद का मंचन किया गया। लक्ष्मण जनक व परशुराम संवाद को सुनकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
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सीता के बड़े होने पर राजा जनक स्वयंबर का आयोजन करते हैं। इस स्वयंबर में कई देशों के राजा-महराजा हिस्सा लेते हैं। रावण और बाणासुर जैसे राजा भी स्वयंबर में शामिल होते हैं।

एक-एक कर सभी शिव धनुष को उठाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कोई राजा उसे उठा नहीं पाता। स्वयंबर में ऋषि विश्वामित्र भी राम और लक्ष्मण के साथ शामिल होते हैं।
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जब राजा जनक निराश हो जाते हैं और वह राजाओं की वीरता पर अंगुली उठाना शुरू कर देते हैं। इसी बीच लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र से आज्ञा लेकर निराश हुए राजा जनक को जवाब देने के लिए खड़े होते हैं।

जनक की बात को सुनकर लक्ष्मण कहते हैं सच्चे योद्धा, सच्चे क्षत्रिय अपमान नहीं सह सकते हैं, जिनको सुनने का ताव नहीं वह चुप कैसे रह सकते हैं।

इसके बाद विश्वामित्र के  आदेश पर राम शिव धनुष को उठाते हैं। धनुष टूटते ही राजमहल में जय-जयकार होने लगती है और सीता राम को जयमाल डालकर उनका वरण करती हैं।

इसके बाद परशुराम का आगमन होता है और वह धनुष टूटने पर नाराजगी व्यक्त करते हैं। रामलीला में लक्ष्मण जनक और परशुराम संवाद लोगों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।

राजा जनक की भूमिका दिनेश सहगल, सीता योगांधा वशिष्ठ, राम रीतेश कुमार, लक्ष्मण अनिल चावला, रावण श्रवण चावला, बाणासुर हरीश बाटला और विश्वामित्र की भूमिका गुरुमुख नागपाल ने निभाई।
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