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आरव की मौत पर जाग जाते तो नहीं बुझते दो घरों के चिराग

Mon, 06 Aug 2018 10:31 AM IST
जेपी शर्मा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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बोटिंग पूल - फोटो : अमर उजाला
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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अधिकारियों की अनदेखी के कारण ही अधूरे पड़े बोटिंग पूल पर लगभग आठ फीट बारिश का पानी भरा हुआ था जिसमें डूबकर दो घरों के चिराग बुझ गए। म्यू-2 में पांचवीं के इन दो छात्रों की प्राधिकरण की लापरवाही से मौत का यह मामला पहला नहीं है।

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एक साल पहले 11 जुलाई को इसी सेक्टर स्थित प्राधिकरण की सोसायटी में नाली में गिरने से डेढ़ साल के मासूम आरव की मौत हो गई थी। बच्चे की मौत पर सोसायटी के लोगों का आक्रोश फूट पड़ा था।

लोगों ने पहले प्राधिकरण कार्यालय पर हंगामा किया और फिर परी चौक पर जाम लगा दिया था। मामले मेें जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने भी यूपी पुलिस और नोएडा पुलिस को ट्वीट किया था। इसके बाद प्राधिकरण के अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन न तो एफआईआर र्हुई और न ही पुलिस ने ठोस कार्रवाई की।
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इकलौता बेटा था आर्यन
आर्यन इकलौता बेटा था। उसकी दो बड़ी बहनें ज्योत्सना और तृष्णा हैं। पिता सिक्योरिटी गार्ड हैं। वहीं, सोहिल के दो भाई और एक बहन भी है। दोनों बच्चों की मौत से परिजन और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

बच्चों के कपड़े बरामद नहीं होने से उठे सवाल
चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों बच्चों के कपड़े मौके से बरामद नहीं हुए हैं। दोनों के शव बोटिंग पूल में बिना कपड़ों के पड़े थे। इससे ये सवाल उठ रहा है कि अगर बच्चे कपड़े उतारकर नहा रहे थे तो कपड़े कहां चले गए। वहीं, यह भी अंदेशा होने लगा है कि कहीं बच्चों के साथ कोई और अनहोनी तो नहीं हुई यानी किसी ने हत्या कर दोनों के शव वहां फेंक तो नहीं दिए।

गार्ड और नीलगाय की भी हो चुकी है मौत 
सोहिल के परिवार के गजेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने इस मामले में प्राधिकरण और यूनिटेक बिल्डर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसी बोटिंग पूल में पहले एक गार्ड और एक नील गाय की भी मौत हो चुकी है।

दोनों की दोस्ती की रही चर्चा
आर्यन का परिवार पांच माह पहले ही गांव आया था। आर्यन और सोहिल एक ही कक्षा में पढ़ते थे। दोनों स्कूल भी साथ जाते थे और गांव में भी अक्सर साथ ही दिखाई देते थे। फ्रेंडशिप-डे की पूर्व संध्या पर आर्यन दोस्त के कहने पर जंगल में चला गया और दोनों की डूबने से मौत हो गई। शव मिलने के बाद गांव में उनकी दोस्ती की भी खासी चर्चा रही।

बिल्डर को 2006 में हुआ था जमीन का आवंटन 
ग्रेटर नोएडा। म्यू टू में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने यूनिटेक को 100 एकड़ जमीन 2006 में आवंटित की थी। नवंबर 2015 तक इस पर करीब 1055 करोड़ रुपये बकाया हो गए। बिल्डर ने प्राधिकरण की जमीन के एवज में पैसे जमा नहीं किए, जिससे प्राधिकरण ने नवंबर 2015 में आवंटन रद्द कर दिया। उस समय कागजों में तो प्राधिकरण ने जमीन पर कब्जा ले लिया, लेकिन मौके पर हुए निर्माण की तरफ ध्यान नहीं दिया। ये बोटिंग पूल तभी का बना हुआ है, जिसमें डूबने से दो बच्चों की मौत हो गई।

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