भाजपा के फायर ब्रांड नेता व शेरो-शायरी के जरिए अपनी बातों से लोगों का दिल छूने वाले नवजोत सिंह सिद्धू आम आदमी पार्टी से दिल्ली विधानसभा चुनाव में झटका खाकर ही उसके कायल हो गए थे।
पंजाब में भाजपा से अकालियों के गठबंधन का विरोध लोकसभा चुनाव के पहले से ही कर रहे सिद्धू तभी से आप के संपर्क में थे और अब उनके पास मौका भी था और दस्तूर भी।
हालांकि आप नेता सिद्धू को पार्टी में शामिल कर मुख्यमंत्री पद पर प्रोजेक्ट करने को लेकर अभी स्पष्ट नहीं बोल रही है। दरअसल, दिल्ली के 2013 के दिल्ली के विधानसभा चुनाव में भाजपा को झटका देकर सत्ता तक पहुंची आम आदमी पार्टी की कुशल रणनीति, भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाने, उसके सबसे अलग चुनावी घोषणा पत्र, वोलंटियर्स का समर्पण व केजरीवाल की लोकप्रियता को नवजोत सिंह सिद्धू ने काफी नजदीक से देखा।
दिल्ली में भाजपा की नैय्या पार लगाने को मिली थी जिम्मेदारी
नवजोत सिद्धू
- फोटो : फाइल फोटो
चुनावों के दौरान नितिन गडकरी को प्रभारी तो सिद्धू को सह प्रभारी के रूप में दिल्ली में भाजपा की नैय्या पार लगाने की जिम्मेदारी इस चुनाव में दी गई थी।
राजधानी में करीब पंद्रह लाख सिख व पंजाबी मतदाताओं को रिझाने के लिए सिद्धू को आगे किया गया। पहली बार ही इस चुनाव में आप ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद उसके 49 दिनों में ही सरकार से इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद वर्ष 2015 के चुनाव में भी सिद्धू ने भाजपा के लिए दिल्ली में जमकर प्रचार किया था। दोनों ही चुनावों में सिद्धू ने दिल्ली में रात-दिन सैकड़ों सभाएं व बैठकें की और आम आदमी पार्टी का निशाने पर रखा।
लेकिन इस बीच सिद्धू ने यह भी देखा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हर वर्ग व जाति का वोटर आप के समर्थन में दिखा। परिणाम भी ऐसा आया जबकि 2015 में तो 70 में से 67 सीटें आप को ही मिलीं।
लोकसभा चुनाव 2014 से पूर्व अकाली-भाजपा गठबंधन का विरोध सिद्धू ने किया था। यह विरोध व आप के प्रति झुकाव सिद्धू का लगातार बढ़ता गया। सूत्रों की मानें तो आप के बड़े नेता 2015 से तो लगातार उनसे संपर्क में थे।
आप को मिलेगा मजबूत चेहरा
केजरीवाल और नवजोत सिद्धू
संजय सिंह ने उन्हें पंजाब के हित में राज्यसभा से त्यागपत्र देने वाला एक साहसी नेता बताया है। आप नेताओं की पूर्व की बयानबाजी पर ध्यान दें तो पंजाब में प्रचार छेड़ चुकी आप के नेता स्थानीय चेहरा पंजाब को देने की बात कहते रहे हैं जबकि इस बीच सिद्धू के भी भाजपा छोड़ने व आप में जाने की चर्चाएं होती रहीं।
आप को मिलेगा मजबूत चेहरा
आम आदमी पार्टी पंजाब में मजबूत स्थिति में तो है लेकिन राजनैतिक पंडितों की मानें तो एक मजबूत स्थानीय चेहरे की कमी उनमें लगातार खल रही
थी। स्टार पावर माने जाने वाले सिद्धू अच्छे वक्ता भी है और किसी भी तरह के भ्रष्टाचार के मामले में उनका नाम नहीं सुनने को मिला है।
भगवंत मान, एचएस फूलका सहित अन्य पंजाबी नेताओं की नाराजगी से बचने के लिए भले ही आप अभी सिद्धू को मुख्यमंत्री पद के रूप में प्रोजेक्ट न करे लेकिन सिद्धू अगर पार्टी में आते हैं तो उसका ग्राफ पहले के मुकाबले बढ़ेगा।