एनजीटी को दी गई रिपोर्ट में बताया कि अहमदाबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑक्यूपेशनल हेल्थ में 18 महीने का अध्ययन किया जा रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। कार सिर्फ सफर को आसान नहीं बनाती, लेकिन उसके भीतर मौजूद कुछ रसायन सेहत के लिए खतरा भी बन सकते हैं। इसी जोखिम की पड़ताल के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अपना अध्ययन तेज कर दिया है।
यह मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में सुनवाई के दौरान सामने आया है। अध्ययन उन रसायनों पर केंद्रित है, जिनका उपयोग कारों में आग से बचाव के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।
आईसीएमआर के अनुसार, अहमदाबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑक्यूपेशनल हेल्थ में 18 महीने का अध्ययन चल रहा है। इसमें 540 पेशेवर ड्राइवरों और 180 अन्य लोगों के खून और यूरिन के नमूनों की जांच होगी। गर्मियों में बंद कारों का तापमान 50 डिग्री से ऊपर पहुंचने पर इन रसायनों का प्रभाव बढ़ने की आशंका भी जताई गई है। अध्ययन से कारों के भीतर छिपे संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।