वर्ष 2014 की आईएएस टॉपर और उत्तरी दिल्ली नगर निगम की उपायुक्त इरा सिंघल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट से अपना दर्द साझा किया है। इरा का कहना है कि उन्हें विशेष वर्ग (दिव्यांग) से होने के कारण कुछ इस तरह संबोधित किया गया, जिससे वे खुद को बेहद आहत महसूस कर रही हैं। टॉपर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा है कि एक फेसबुक पोस्ट में स्क्रीन शॉट्स भी उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से डाले गए हैं। इसका हवाला देते हुए उन्होंने ट्रोल करने वालों पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल के भी आरोप लगाए हैं।
इरा सिंघल ने कहा कि अगर कोई सोचता है कि किसी भी दिव्यांग से कुछ भी कह सकते हैं तो ऐसा नहीं है। इसका गहरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए किसी के साथ ऐसा मजाक करने की कोशिश करना उचित नहीं है। उन्होंने पोस्ट का हवाला देते हुए कहा है कि यह शायद इसलिए किया गया कि इसे करने वाले की सिविल सेवा में आने की चाहत पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने इस मामले में सवाल उठाते हुए कहा कि इसलिए स्कूलों में सभी वर्ग के लिए शिक्षा में बराबरी का दर्जा दिया जाना चाहिए, ताकि बच्चे किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के साथ ही एक बेहतर इंसान भी बनें।
इरा सिंघल फिलहाल उत्तरी निगम के केशवपुरम क्षेत्र में उपायुक्त हैं। सोशल मीडिया पर इरा ने अपनी पीड़ा बताई तो उनके समर्थन में उतरने वालों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने इस मामले में समर्थन करने वालों को धन्यवाद दिया। इरा का समर्थन करने वाले कई लोगों ने इस तरह की पोस्ट करने वालों को सजा दिलवाने की बात कही। इरा ने कहा कि मेरा मानना है कि किसी को सजा मिलने से मानसिकता नहीं बदल सकती है। ऐसा करने से उनमें अचानक बदलाव संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि लोगों की मानसिकता में बदलाव आए और वे दिव्यांगों के साथ अपने बर्ताव को सामान्य रखें। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि इस पोस्ट में मेरे बारे में जो भी कहा गया है, वह गलत है। उन्होंने कहा कि यह गलत इसलिए लगता है, क्योंकि किसी को बगैर वजह अभद्र भाषा से प्रताड़ित किया गया है तो वह गलत है। ऐसा नहीं होना चाहिए। इसके लिए समझने की जरूरत है कि अंधा, बहरा, गूंगा होना कोई खराब बात नहीं है। साइबर माध्यम से किसी के साथ भी ऐसा बर्ताव किया जाना गलत है।