दिल्ली के कथित शराब घोटाले में नया विवाद सामने आया है। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने शराब विक्रेताओं से पैसे मांगने के आरोप में आईएएस अधिकारी अमरनाथ तलवड़े के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही गृह मंत्रालय से अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी सिफारिश की है। वर्ष 2015-16 के इस मामले में एफएसएल ने ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच कर अधिकारी की मिलीभगत का पता लगाया है।
राजनिवास के अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान पता चला कि खुदरा शराब विक्रेताओं से पैसा इकट्ठा करने के लिए एक अधीनस्थ अधिकारी पर दबाव डाला जा रहा था। इस मामले में आरोपी अधिकारी अमरनाथ तलवड़े के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने व गृह मंत्रालय को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। तलवड़े फिलहाल अरुणाचल प्रदेश में तैनात हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, 2015-16 में तलवड़े ने दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड (डीएससीएससी) के वरिष्ठ महाप्रबंधक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान डीएससीएससी के तत्कालीन प्रबंधक पीके शाही (अब सेवानिवृत्त) पर पैसे लेने का दबाव डाला था। इस मामले में दोनों के बीच फोन पर हुई बातचीत की ऑडियो क्लिप सामने आई। क्लिप में डीएससीएससी का कार्यभार संभालने के तुरंत बाद तलवड़े ने पीके शाही से पांच लाख रुपये लेने की बात भी स्वीकार की है।
एफएसएल ने इसे प्रमाणित भी कर दिया है। तलवाड़े 12 जनवरी 2015 से 29 अप्रैल 2016 तक डीएससीएससी में तैनात थे। बातचीत के दौरान तलवड़े कुल संग्रह का 35 फीसदी मांग रहे थे। जबकि शाही सिर्फ 15 फीसदी की व्यवस्था कर सके थे। इससे पहले नोएडा के शख्स ने बीते साल 21 मार्च सतर्कता विभाग को शिकायत के साथ ऑडियो क्लिप भेजी थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि एक आईएएस अधिकारी और एक इंस्पेक्टर के बीच बातचीत उत्पाद शुल्क मामलों से संबंधित है। प्रारंभिक जांच के बाद डीओवी को पता चला कि मामला शराब घोटाले से जुड़ा है। और बातचीत तलवड़े और शाही के बीच की है।
रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ नहीं
मुख्य सचिव के निर्देश पर सतर्कता विभाग ने ऑडियो क्लिप जांच के लिए एफएसएल दिल्ली को भेजी। एफएसएल ने 28 नवंबर 2023 को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी। इसमें कहा गया कि ऑडियो रिकॉर्डिंग में किसी भी प्रकार के बदलाव नहीं है। इसके बाद मामला कानून विभाग को भेजा गया। विभाग ने राय दी कि यह एफआईआर दर्ज करने के लिए एक उपयुक्त मामला है। इसके बाद, डीओवी ने तलवाडे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामले को एसीबी को भेजने का प्रस्ताव रखा। इसे मंजूरी के लिए एलजी के पास भेजा।