मटियाला विधानसभा क्षेत्र के कंगनहेड़ी गांव स्थित ऐतिहासिक तालाब के पुनरुद्धार और सुंदरीकरण का काम अधर में लटक गया है। स्थानीय विरोध, अतिक्रमण और कानूनी अड़चनें इसके मुख्य कारण हैं। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (आईएंडएफसी) और एसडीएम मटियाला ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को अपनी स्थिति रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, राजस्व विभाग ने सीमांकन के बाद तालाब से गाद निकालने का कार्य पूरा किया है। तालाब को अतिक्रमण और गंदगी से बचाने के लिए चारों ओर लोहे की फेंसिंग लगाई जा रही है। पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में यह फेंसिंग पूरी हो गई है। हालांकि, उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में ग्रामीणों के विरोध के कारण काम रोकना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि फेंसिंग से उनके घरों तक आने-जाने का रास्ता बंद हो जाएगा। विभाग ने यह भी बताया कि सितंबर 2024 में पूर्वी हिस्से में लगाई गई फेंसिंग को असामाजिक तत्वों ने तोड़ दिया था। अतिक्रमण हटाने का वर्ष 2023 का मामला फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इसकी अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को होनी है।
निरीक्षण में सामने आईं खामियां
एसडीएम, राजस्व विभाग, बीडीओ और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया। इसमें कई गंभीर खामियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि गांव का गंदा सीवर और नालों का पानी सीधे तालाब में गिर रहा है। इससे तालाब का पानी पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है। तालाब के किनारे भी कमजोर और दलदली हो गए हैं।
विभाग की सिफारिशें और आगे की योजना
संयुक्त टीम ने एनजीटी से तालाब में गिर रहे सीवर के पानी को तुरंत रोकने की सिफारिश की है। आसपास जमा कचरे की नियमित सफाई और तालाब के चारों ओर मजबूत चारदीवारी बनाने का सुझाव भी दिया गया है। विभाग ने एनजीटी को आश्वस्त किया है कि पुलिस सुरक्षा और अतिक्रमण मुक्त जमीन मिलने पर शेष फेंसिंग का काम एक महीने में पूरा हो जाएगा। लोगों की सुविधा के लिए वॉक-वे विकसित करने का भी सुझाव दिया गया है।