नियमित दवा लेने वाले रोगियों में 73.7 फीसदी मरीजों में नियंत्रित रक्तचाप
वहीं बीपी को कम करने वाली दवा लेने वाले रोगियों से 73.7 फीसदी मरीज में नियंत्रित रक्तचाप देखा गया। वहीं, पुरुषों की तुलना में महिलाएं, ग्रामीण व सामाजिक रूप से वंचित समूहों से संबंधित लोगों में जागरूकता न होने के कारण जानकारी होने के बाद भी उन्होंने अपना इलाज शुरू नहीं करवाया। इनकी स्थिति खराब दिखी। प्राइमस अस्पताल के वरिष्ठ विकास चोपड़ा का कहना है कि हाइपरटेंशन के कारण दिल की बीमारियां, हृदय अटैक, घातक दिमागी स्ट्रोक, गुर्दे की बीमारी सहित अन्य समस्याएं हो सकती हैं। बीपी की समस्या कई कारणों से हो सकती है। इसमें आनुवंशिक प्रभाव, खराब लाइफस्टाइल, बढ़ती उम्र, लगातार तनाव सहित अन्य शामिल हैं।
हो सकते हैं दूसरे कारण भी
40 साल से कम उम्र के लोगों में बीपी की समस्या होने के लिए दूसरे कारण भी हो सकते हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेस व जीटीबी अस्पताल के मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ अमितेश अग्रवाल का कहना है कि शोध में पाया गया है कि 40 साल से कम उम्र के लोगों में बीपी के लिए किडनी व हार्मोन की समस्या भी पाई गई है। ऐसे मरीजों में इन कारणों से संबंधित उपचार देने पर बीपी की समस्या भी अपने आप ही कम होने के संकेत मिले हैं। ऐसे में कम उम्र के मरीजों में यदि बीपी की समस्या पाई जाती है तो पहले दूसरे कारणों का पता लगाया जाता है। डॉ अग्रवाल ने कहा कि बीपी साइलेंट किलर है, जो दूसरी बीमारियों को जन्म देता है। कई बार मरीज को बीपी की समस्या का पता ही नहीं चल पाता और दूसरी बीमारी समस्या बन जाती है।