दो पाठ्यक्रम शुरू किए
इस प्रोजेक्ट का कामयाब बनाने के लिए एनएसयूटी ने दो नए पाठ्यक्रम भी शुरू किए हैं। इसमें स्नातक स्तर पर हाइड्रोपोनिक्स प्रौद्योगिकी और स्नातकोत्तर स्तर पर कंट्रोल इनवायरमेंट इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम है। एनएसयूटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस पाठ्यक्रम में जल्द ही अन्य संस्थानों के छात्रों, नवोदित उद्यमियों और स्थानीय किसानों के लिए इंटर्नशिप और प्रमाणपत्र कार्यक्रमों के रूप में पेश किए जाएंगे। हाइड्रोपोनिक्स प्रशिक्षण और अनुसंधान केंद्र सतत कृषि और उद्यमशीलता विकास को बढ़ावा दे रहा है।
ऐसे होता है बायो बिजली का उत्पादन
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया से पौधे भोजन बनाते हैं। इसमें वह करीब 40 फीसदी ऊर्जा का इस्तेमाल अपने लिए करते हैं, जबकि 60 फीसदी हिस्सा जड़ों के आसपास चला जाता है। पौधे के लिए इसका खास उपयोग नहीं है। प्रोजेक्ट में फोकस इसी 60 फीसदी पर रखा गया है। इसका उपयोगी बनाने के लिए ऐसे बैक्टीरिया का इस्तेमाल होता है, जो इस ऊर्जा का तोड़ सकें। इससे जो इलेक्ट्रान निकलता है, उसी का पीएमएफसी में इस्तेमाल होता है।
अब तक लगभग 1200 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। पीएमएफसी के जरिये उत्पादन होने वाली बायो बिजली का उपयोग वहां लगी हल्की रोशनी के बल्ब को जगमग किया जा रहा है। इसकी क्षमता बढ़ाने पर भी शोध किया जा रहा है। इस तकनीक में फसल उत्पादन करना किफायती है। - डॉ. अखिलेश दुबे, सहायक प्रोफेसर, एनएसयूटी