संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय प्रोफेशनल बॉडीबिल्डर और मिस एशिया का खिताब जीतने वाली डॉली सैनी की सफलता केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और पारिवारिक सहयोग की प्रेरक कहानी भी है। आर्थिक तंगी, सामाजिक ताने और तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया।
डॉली ने बताया कि करियर के शुरुआती दौर में घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि जिम की फीस के भी पैसे नहीं थे। समाज और रिश्तेदार अक्सर कहते थे कि बॉडीबिल्डिंग लड़कियों का खेल नहीं है, लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। दिन में करीब 12 घंटे नौकरी करने के बाद वह नियमित रूप से जिम में अभ्यास करतीं थीं। महंगी डाइट, प्रोटीन और सप्लीमेंट का खर्च उठाना आसान नहीं था, फिर भी उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा लहराना था।
पति बने सबसे बड़ी ताकत
डॉली के संघर्ष में उनके पति विनय हर कदम पर साथ खड़े रहे। आर्थिक संकट के दौरान उन्होंने अपनी कमाई से जिम की फीस भरी, अतिरिक्त काम और ओवरटाइम करके ट्रेनिंग और डाइट का खर्च उठाया तथा घर की जिम्मेदारियां भी संभालीं। वह हमेशा डॉली का हौसला बढ़ाते हुए कहते थे, तुम सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ दो, घर की चिंता मुझ पर छोड़ दो। यही विश्वास डॉली की सबसे बड़ी ताकत बन गया। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद डॉली सैनी ने इंडिया बॉडी बिल्डिंग के कोच देवेंद्र कुमार सेन के मार्गदर्शन में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। लगातार मेहनत और अनुशासन के दम पर उन्होंने प्रतिष्ठित मिस एशिया का खिताब जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा
डॉली सैनी का कहना है कि यह जीत केवल उनकी नहीं बल्कि उनके पति विनय की भी है, जिन्होंने हर कठिन दौर में उनका साथ दिया। उनका मानना है कि परिवार का विश्वास और सहयोग मिल जाए तो कोई भी सपना असंभव नहीं रहता। आज उनकी कहानी उन लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही हैं।