केंद्र सरकार ने बेशक महिलाओं को नगर पालिका चुनावों में 33 प्रतिशत आरक्षण दया हो। आरक्षण मिलने के बाद महिला पार्षद बन भी गई हों लेकिन इनमें से अधिकांश चूल्हा-चौका तक ही सीमित हैं।
नगरपालिका की बैठक में इन महिला पार्षदों के पति, ससुर या फिर बेटे ही भाग ले रहे हैं। ये ही अपने वार्ड की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हैं। मजे की बात है कि अधिकारियों को पता होने के बाद भी उचित कार्रवाई नहीं करते हैं।
बता दें कि नगरपालिका फिरोजपुर झिरका में कुल 15 पार्षद हैं। इन 15 पार्षदों में से आठ महिला पार्षद हैं। जबकि नगरपालिका की उपप्रधान भी महिला पार्षद ही हैं। नगरपालिका के प्रधान, उपप्रधान के चुनाव या फिर कोई बड़ा अधिकारी पार्षदों की बैठक लेता है तो ही महिला पार्षद नगरपालिका की बैठक में दिखाई देती हैं।
जबकि अधिकांशत इन महिला पार्षदों के ससुर, बेटे या फिर पति ही नगरपालिका की बैठक में भाग लेते र्हैं। विशेष बात तो यह है कि नगरपालिका के अधिकारियों को पता है कि पार्षद कौन है? लेकिन उनकी भी हिम्मत नहीं पड़ती की के वे असली पार्षदों को सदन की बैठक में बैठने दें।
उपायुक्त के आदेशों का नहीं है कोई असर
उपायुक्त नूंह मनीराम शर्मा ने कई बार आदेश किए हैं कि नगरपालिका, जिला परिषद, ग्राम पंचायत, पंचायत समितियों की बैठकों में महिला पार्षद ही भाग लें । यदि उनकी जगह पर उनके पति, बेटे या फिर ससुर भाग लेते हैं तो उनके खिलाफ संबंधित विभाग के अधिकारी पुलिस में मामला दर्ज करवाएं। लेकिन उपायुक्त के आदेशों का नरग पालिका के अधिकारियों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। यही कारण है कि महिला पार्षदों की जगह पर उनके पति, ससुर एवं बेटे चौड़े होकर नगरपालिका की मीटिंग में बैठते हैं और अपने आप को ही वार्ड का पार्षद बताते हैं।
अभी कुछ दिन पूर्व ही मैने बतौर नपा सचिव फिरोजपुर झिरका कार्यभार संभाला है। भविष्य में नपा के पार्षदों की होने वाली बैठकों में महिला पार्षदों को ही बैठने की अनुमति होगी। उनके पति, ससुर या बेटों को मीटिंग में नहीं बैठने दिया जाएगा।-पंकज दून, नगरपालिका सचिव, फिरोजपुर झिरका।