न्यायालयों पर केस के दबाव को कम करने के लिए भारत सरकार ग्राम न्यायालय स्थापित करने पर विचार कर रही है। इनमें छोटे-छोटे लड़ाई झगड़े या अन्य मामलों का निपटारा गांव के स्तर पर ही करने का प्रयास किया जाएगा।
यह न्यायालय 2-3 गांवों के कलस्टर के बीच स्थापित करने का प्रस्ताव है, जहां पर जिले की अदालतों से न्यायिक अधिकारी गांव में जाकर छोटे-छोटे केस का निपटारा वहीं पर करेंगे।
इस बात की जानकारी बुधवार को जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के अध्यक्ष तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरनाम सिंह ठाकुर ने न्यायिक परिसर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी। उनके साथ जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव एवं चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अभिषेक फुटेला भी थे।
प्रेसवार्ता में 8 अप्रैल को लगने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला गुरुग्राम में लगाई जा रही फैमिली कोर्ट में लगभग 1876 मामले चल रहे हैं।
अब पॉक्सो एक्ट, फैमिली कोर्ट तथा चेक बाउंस के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए गुरुग्राम में इनकी एक-एक और कोर्ट स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा गया है। गुरुग्राम में चेक बाउंस के मामलों की सुनवाई के लिए वर्तमान में 4 विशेष अदालतें चल रही हैं, लेकिन मामलों की संख्या लगभग 20 हजार है, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। इसके लिए एक और अदालत की जरूरत है।
ठाकुर ने कहा कि गुरुग्राम में लगने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में तीन महीनों से पुराने समरी केसों के अलावा 1674 प्रभावी मामले 08 बेंचों में रखे जाएंगे। इनमें फौजदारी, दीवानी, राजस्व, मोटर वाहन दुर्घटना, बैंक रिकवरी, जमीन अधिग्रहण, सर्विसिज, चेक बाउंस होने, क्लेम, वैवाहिक विवाद संबंधी मामले शामिल हैं।