पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों के बीच महरौली क्षेत्र से विधानसभा की टिकट को लेकर विवाद शुरू हुआ था। चूंकि सरिता चौधरी पार्टी में कई अहम पदों पर रह चुकी हैं। वहीं उनके पति भी जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में दोनों के अपने अपने दावे थे। दोनों ही एक ही विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहते हैं। बैठक के बाद टिकट को लेकर ही आपस में बहस शुरू हुई थी। जानकारी मिल रही है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता सरिता चौधरी को टिकट देने के पक्ष में हैं।
पार्टी से नहीं जिम्मेदारी से किया मुक्त
दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आजाद सिंह को जिलाध्यक्ष पद से हटा दिया है। हालांकि आजाद सिंह को अभी पार्टी से निष्कासित नहीं किया है। पार्टी के अनुसार इस घटना को लेकर जांच टीम गठित की गई है। रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष को मिला मौका
बताया जा रहा है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता इस घटना को लेकर काफी चिंता में है। सभी का मानना है कि पार्टी कार्यालय में महिला से मारपीट होने के मामले ने विपक्ष को पूरा मौका दे दिया है। चूंकि सरिता सिंह कई बड़े पदों पर रह चुकी हैं और सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के कार्यकर्ता भी तीखी टिप्पणियां भाजपा पर कर रहे हैं। ऐसे में नेता जल्द ही इस मामले को रफा दफा करने में जुटे हैं।