सात साल पहले पति दो बेटियों और एक बेटे को छोड़कर चला गया। मैंने घरों में काम कर बच्चों का भरण पोषण किया। अब, महंगाई के दौर में बेटी का विवाह करने की स्थिति में नहीं थी लेेकिन ऐसे में महिला शक्ति उत्थान मंडल ने मेरी मदद की और मैं बेटी का विवाह कर दिया।
ये शब्द मूलरूप से पश्चिम बंगाल और हाल ही में तुगलकाबाद दिल्ली निवासी आरती विश्वास के हैं। वह गामा-2 स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में बेटी ज्योति का विवाह कराने पहुंची थी। विवाह समारोह में कुल छह जोड़े दांपत्य बंधन में बंधे।
महिला शक्ति उत्थान मंडल की रूपा गुप्ता ने बताया कि उनके संगठन ने आर्थिक रुप से कमजोर परिवार की बेटियों का विवाह कराने की योजना बनाई थी। इसके अंतर्गत संगठन की ओर से शहर व आसपास के कस्बे में बैनर लगाए गए थे। कई परिवारों ने उनसे संपर्क किया।
संगठन ने छह लड़कियों के विवाह की जिम्मेदारी ली। इसके लिए विभिन्न सामाजिक संगठन व लोगों ने उनकी मदद की। बृहस्पतिवार को आयोजित विवाह समारोह में पलवल की सपना व मनोज, जेवर की संगीता व संजय, दनकौर की नैना व सुनील, घोड़ी बछेड़ा की सोनिया व टेकचंद, सूरजपुर की अंजलि व कृष्ण , तुगलकाबाद दिल्ली की ज्योति व सुनील का विवाह संपन्न कराया गया।
जाम में फंसी दुल्हन, दूल्हे ने किया इंतजार
सभी जोड़ों के विवाह स्थल, मंडप, वरमाला, फेरेे, भोजन आदि की व्यवस्था संगठन की ओर से की गई। जोड़ों को नए जीवन की शुरुआत करने के लिए घरेलू जरूरत के सामान भी उपहार स्वरूप दिए गए।
इस अवसर पर प्रवीण गर्ग, दीपक भाटी, रामनिवास शर्मा, लीना शर्मा, मुकेश शर्मा, देवेंद्र टाइगर, शैलेंद्र सिंह, वीरेश वैसला, संजय श्रीवास्तव, डीपी पांडे, नीरज अग्रवाल, अमित गोयल, वीरेंद्र रौसा आदि ने भी सहयोग दिया।
हरियाणा के पलवल से विवाह स्थल पर आने के दौरान दुल्हन सपना की गाड़ी जाम में फंस गई। शहर में पहुंचने के बाद भी चालक रास्ता भटक गया। इसके चलते सपना के दूल्हे मनोज को अन्य जोड़ों के बीच दुल्हन का लंबा इंतजार करना पड़ा। सपना दोपहर लगभग ढाई बजे विवाह स्थल पर पहुंची।