-शादी के सिर्फ 11 महीने बाद, 27 जुलाई 2015 को नूर सबा ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। द्वारका कोर्ट ने जाकिर हुसैन नाम के व्यक्ति को अपनी पत्नी नूर सबा (जूली) की मौत के मुख्य आरोपों से बरी किया है। कोर्ट ने कहा कि दहेज की मांग या पत्नी को प्रताड़ित करने का कोई सबूत नहीं मिला। जाकिर हुसैन और नूर सबा की शादी 9 अगस्त 2014 को हुई थी। शादी के सिर्फ 11 महीने बाद, 27 जुलाई 2015 को नूर सबा ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शुरू में जाकिर हुसैन और उनके परिवार पर दहेज मांगने और क्रूरता करने का आरोप लगाया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश स्वाति गुप्ता ने फैसले में लिखा कि सरकार इन आरोपों को साबित करने में पूरी तरह असफल रही। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण आत्महत्या ही बताया गया। दहेज या प्रताड़ना का कोई प्रमाण नहीं मिला। इसलिए अदालत ने जाकिर हुसैन को 498ए (क्रूरता) और 304बी (दहेज मौत) के आरोपों से बरी कर दिया।
कोर्ट में कुल 22 गवाह पेश किए गए। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण गवाह मृतका के पिता अब्दुल जब्बार, भाभी रोशन आरा और चचेरे भाई नसीम अंसारी ने पुलिस को दिए अपने पुराने बयान से मुकर गए। पिता अब्दुल जब्बार ने कोर्ट में कहा कि जाकिर ने कभी दहेज नहीं मांगा। वह फर्नीचर की दुकान खोलने के लिए 10 लाख रुपये का प्रस्ताव लेकर आए थे, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद उनकी बेटी ने कभी कोई शिकायत नहीं की। जांच के दौरान जाकिर हुसैन फरार हो गए थे, जिसके बाद उन्हें घोषित अपराधी किया गया था। बाद में वे खुद सरेंडर कर गए। कोर्ट ने इस वजह से उन्हें धारा 174ए के तहत दोषी ठहराया है। मृतका के परिवार ने कोर्ट से न्याय की उम्मीद लगाई थी, लेकिन गवाहों के बयान बदलने से मामले में कमजोर पड़ गया।