डीयू के वीसी के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता मधु किश्वर ने कहा कि प्रो. दिनेश सिंह को यूजीसी की ओर से धमकी मिली है, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
किश्वर ने कहा कि वीसी पर फैसला बदलने या फिर इस्तीफा देने का दबाव डाला जा रहा था।
यही नहीं, यूजीसी ने यह भी धमकी दी थी कि अगर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पेपर तैयार हो चुके हैं। किश्वर ने कहा कि वीसी, एचआरडी मिनिस्टर से मिलने भी गए लेकिन वह नहीं मिलीं। उन्होंने बताया कि वीसी ने अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है।
मामले में राजनीतिक रंग
उधर, डीयू के वीसी के इस्तीफा देने के बाद अब इस मामले में अब राजनीतिक बयान बाजी का भी दौर शुरू हो चुका है।
बृंदा करात ने कहा कि यह दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों और शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि वर्तमान सरकार के इस कार्य से डीयू की स्वायत्तता पर सवाल उठता है। इस फैसले से डीयू की हंसी़ उड़ाई जाएगी।
वहीं, डीयू के प्रो-वीसी सुधीश पचौरी ने भी इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बताया कि वीसी दिनेश सिंह ने अभी इस्तीफा नहीं दिया है। अभी इसकी सिर्फ घोषणा की गई है।
विवाद के बाद इस्तीफा
दिल्ली यूनिवर्सिटी और यूजीसी के बीच उपजे विवाद में अब एक और रोचक मोड़ आ गया है। यूजीसी के आदेश के बावजूद अपनी जिद पर अड़े डीयू के वीसी प्रो. दिनेश सिंह ने इस्तीफा दे दिया है।
पिछले दो दिनों से चल रहे हाईप्रोफाइल विवाद में जारी बैठकों के दौर और विरोध प्रदर्शन के बीच डीयू के वीसी ने यह कदम उठाया है।
बता दें कि यूजीसी ने चार वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स खत्म करने को लेकर आदेश जारी किया था जबकि वीसी एफवाईयूपी के समर्थन में ही अड़े थे। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इस्तीफे की पुष्टि की है।
सुप्रीम कोर्ट ने किया इंकार
डीयू और यूजीसी के बीच छिड़ा घमासान अब कोर्ट तक पहुंच गया है। दाखिला संकट पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक याचिका दायर की गई है।
हालांकि सर्वोच्च अदालत ने इस मामले की सुनवाई से इंकार कर दिया है। डीयू की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य एएन मिश्र ने कहा है कि अब वे बुधवार को हाईकोर्ट में इस मसले पर अपील करेंगे।
बता दें कि यूजीसी पर डीयू की स्वायत्तता पर प्रहार करने का आरोप लगाते हुए एएन मिश्रा ने भूख हड़ताल शुरू की है।
मामले में रोचक मोड़
डीयू में दाखिला संकट को लेकर मचे घमामसान को दूर करने के लिए अब यूजीसी और दिल्ली यूनिवर्सिटी ने बीच का रास्ता निकाल लिया है। इससे एफवाईयूपी को लेकर उठे विवाद पर अब रोचक मोड़ आ गया है।
सूत्रों के मुताबिक, काफी सोच विचार के बाद इस बात पर सहमति बनी है कि बीए और बीकॉम कोर्स को तीन साल का कर दिया जाए।
साथ ही विज्ञान पाठ्यक्रमों को चार साल का ही रखा जा सकता है। इस मामले में फिलहाल अभी और भी विचार विमर्श जारी है। डीयू के रजिस्ट्रार ने यूजीसी के फैसले पर सहमति जताते हुए कहा कि दिशानिर्देश स्पष्ट हैं।
'फैसला वापस ले UGC'
दिल्ली यूनिवर्सिटी में चार वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स खत्म करने के यूजीसी के फैसले के खिलाफ डीयू प्रशासन ही नहीं, छात्र भी उतर आए हैं।
एफवाईयूपी के तहत डीयू से बीटेक कर रहे छात्रों ने यूजीसी ऑफिस के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। छात्रों की मांग है कि यूजीसी अपना फैसला वापस ले।
बता दें कि, एफवाईयूपी के खत्म होने से डीयू में बीटेक कर रहे छज्ञत्रों के भविष्य पर संकट आ जाएगा। चार वर्षीय पाठ्यक्रम के तहत दाखिला लेने वाले इन छात्रों को तीन साल में ही पढ़ाई खत्म करनी पड़ेगी और इससे उन्हें सिर्फ बीएससी की डिग्री ही मिलेगी। यही हाल बीएमएस कोर्स में भी है।
भूख हड़ताल शुरू
दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिले का लेकर उठी तकरार अब और बढ़ती जा रही है। यूजीसी की ओर से चार वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स खत्म करने के आदेश के बाद अब छात्र संगठनों और डीयू के शिक्षकों ने भी आवाज और बुलंद कर दी है।
यूजीसी का आदेश आने के बाद लगातार दूसरे दिन भी राजधानी दिल्ली में माहौल गरम है। डीयू दाखिले को लेकर एक ओर जहां छात्र-छात्राओं में असमंजस बरकरार है वहीं, दूसरी ओर यूजीसी के फैसले के समर्थन और विरोध में भी आवाज उठ रही है।
डीयू की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य एएन मिश्रा ने डीयू में छाए दाखिला संकट के लिए एचआरडी मिनिस्ट्री और यूजीसी को जिम्मेदार ठहराते हुए भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
यूजीसी के खिलाफ हल्लाबोल!
भूख हड़ताल पर बैठे डीयू की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य एएन मिश्रा ने यूजीसी पर यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता पर हमला करने का आरोप लगाया है।
उधर, डीयू में दोतरफा माहौल दिखने लगा है। छात्र संगठन एबीवीपी जहां यूजीसी के फैसले पर खुशी जताते हुए इसे तत्काल लागू करने की मांग कर रहा है वहीं, कुछ संगठन इसके विरोध में डीयू के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं।
समर्थन और विरोध की इस लड़ाई में छात्र और शिक्षक सभी शामिल हैं।
आज जारी होनी थी कट-ऑफ
उधर, यूजीसी और डीयू के बीच बढ़ी तकरार के बाद मंगलवार को भी सुबह से ही बैठकों का दौर जारी है। इस मामले में एचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी का कहना है कि उन्हें कुछ भी बोलने की आजादी नहीं है।
बता दें कि आज डीयू एडमिशन के लिए पहली कट-ऑफ लिस्ट जारी होनी थी, लेकिन यूजीसी के आदेश को मानने से मना करने के बाद डीयू ने इस मुद्दे का और बढ़ा दिया है।
यूजीसी ने रविवार को आदेश जारी करते हुए डीयू को कहा था कि वह तीन वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स ही लागू करें।