-एम्स के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और अन्य विभागों के साथ डीआरबीआरएआईआरसीएच द्वारा हुआ सम्मेलन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
महिलाओं में तीसरा सबसे आम और बेहद घातक माने जाने वाले सर्वाइकल कैंसर को पूरी तरह खत्म करने की तैयारी शुरू हो गई है। एचपीवी वैक्सीनेशन को बड़े पैमाने पर लागू करने, स्क्रीनिंग की सुविधाएं बढ़ाने और उपचार की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए शनिवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में देश का पहला राष्ट्रीय सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। आयोजन एम्स के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और अन्य विभागों के साथ डीआरबीआरएआईआरसीएच (डॉ. बी.आर. अम्बेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल) द्वारा हुआ। सम्मेलन में नीति आयोग, स्वास्थ्य मंत्रालय, कैंसर संस्थानों, विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ, आईसीएमआर और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
विशेषज्ञों ने कहा कि एचपीवी वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। साथ ही एचपीवी डीएनए टेस्टिंग के जरिये स्क्रीनिंग को बढ़ाने पर जोर दिया। खास बात यह रही कि महिलाओं को खुद से जांच के लिए सैंपल देने यानी सेल्फ-सैंपलिंग की सुविधा देने की सिफारिश की गई, जिससे ज्यादा से ज्यादा महिलाएं जांच करा सकें। उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएमएच) की अतिरिक्त सचिव आराधना पटनायक ने कहा कि देश में सर्वाइकल कैंसर का उन्मूलन संभव है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एचपीवी वैक्सीनेशन के विस्तार, स्क्रीनिंग सुविधाओं को मजबूत करने और इलाज तक महिलाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने कहा कि देश के पास सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने का ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने जोर दिया कि इसके लिए पूरे स्वास्थ्य तंत्र को एक साथ काम करना होगा। डॉ. पॉल ने सुझाव दिया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एचपीवी डीएनए टेस्टिंग और सेल्फ-सैंपलिंग को लागू करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएं।
एम्स डीआरबीआरएआईआरसीएच के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शंकर ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम अब किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। सरकार, डॉक्टर, उद्योग और समाज को मिलकर काम करना होगा। सम्मेलन में देशभर से 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ, आईसीएमआर, राज्य स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।