- देश में हर साल 80 हजार महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से तोड़ रही दम, आते हैं सवा लाख से ज्यादा नए केस
- 30 की उम्र के बाद महिलाएं करवा सकती हैं यह टेस्ट, कैंसर के साथ हो सकेगी संक्रमण की पहचान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। महिलाएं एचपीवी (ह्यूमन पेपिलोमावायरस) डीएनए (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) टेस्ट करवाकर 5 साल सर्वाइकल कैंसर से राहत पा सकती हैं। 30 साल की उम्र के बाद महिलाएं यह जांच करवा सकती हैं। यह जांच न केवल सर्वाइकल कैंसर की पहचान कर सकता है बल्कि एचपीवी के संक्रमण को पकड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे बड़ा कैंसर है। हर साल देश में करीब सवा लाख नए मामले सामने आते हैं। करीब 80 हजार महिलाएं इस कैंसर के कारण दम तोड़ देती हैं। समय पर इस कैंसर या इसके संक्रमण की पहचान हो जाए तो इलाज संभव है। डॉक्टर का कहना है कि स्क्रीनिंग के माध्यम से मरीज को शुरुआती चरण में ही पहचाना जा सकता है। इसमें एचपीवी डीएनए एक कारगर टेस्ट है। यह पैप स्मीयर टेस्ट के मुकाबले ज्यादा कारगर है।
एम्स के रेडिएशन ऑनकोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शंकर ने बताया कि 30 साल के बाद महिलाएं एचपीवी डीएनए टेस्ट को करवा सकती हैं। इससे पता चल जाएगा कि उक्त महिला में एचपीवी का संक्रमण, कैंसर है या नहीं। साथ ही अगले पांच साल में इसके होने की आशंका का आकलन लगाया जा सकता है। इस जांच से 95 फीसदी तक सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। जांच के बाद यदि रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो इलाज शुरू किया जा सकता है।
ऐसे होता है जांच
एचपीवी डीएनए टेस्ट में महिला के निजी अंगों से सैंपल लिया जाता है। यह टेस्ट गर्भाशय ग्रीवा से कोशिकाओं का एक नमूना लेता है और फिर एचपीवी के डीएनए की तलाश करता है। एम्स में इस टेस्ट की सुविधा है। विशेषज्ञ पैप स्मीयर टेस्ट की जगह एचपीवी डीएनए टेस्ट करवाने को प्राथमिकता देते हैं।
महिलाएं खुद दे सकती हैं सैंपल
एचपीवी डीएनए टेस्ट के लिए महिलाएं खुद भी सैंपल दे सकती हैं। उन्हें किसी स्वास्थ्यकर्मी पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है। सैंपल देने से पहले स्वास्थ्य कर्मी महिलाओं को सैंपल देने के तरीके के बारे में बारीकी से बताते हैं। कोरोना की तरह इसमें भी सलाइवा ही लिया जाता है।
हर महिला में होता है एचपीवी वायरस
ह्यूमन पेपिलोमावायरस वायरस सभी महिलाओं में होता है, लेकिन अधिकांश एचपीवी संक्रमण कोई लक्षण नहीं दिखाते हैं और अपने आप ठीक हो जाते हैं। कुछ प्रकार के एचपीवी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। महिलाओं को यदि किसी भी प्रकार का कोई संक्रमण दिखाई दे तो उन्हें तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टरों की सलाह है कि 30 साल के बाद सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग नियमित करवाते रहना चाहिए।
बचाव के लिए उपलब्ध है वैक्सीन
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। बेहतर परिणाम के लिए इन वैक्सीन को 9 से 14 साल की बच्चियों को दिया जाना चाहिए। शोध बताते हैं कि वैक्सीन की एक डोज ही प्रभावी है। यह वैक्सीन उन ह्यूमन पैपिलोमावायरस टाइप्स के खिलाफ सुरक्षा देती है जो इस कैंसर के प्रमुख कारण होते हैं। वैक्सीन को लेकर केंद्र सरकार ने राष्ट्र व्यापी अभियान भी चलाया है। इसकी मदद से सर्वाइकल कैंसर से मुक्ति पाने का लक्ष्य रखा गया है।