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देखिए, नोट बंद होने से किसकी उखड़ गई सांसे और किनकी उड़ी रातों की नींद

Thu, 10 Nov 2016 04:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
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- फोटो : अमर उजाला
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंगलवार की रात्रि को देश के नाम दिए गए संदेश के बाद भ्रष्टाचारी अधिकारियों एवं काला धन कमाने वालों की सासें उखड़ने लगी हैं। उनके घरों में रखे पांच-पांच सौ एवं एक-एक हजार के नोटों की गड्डियों को बदलवाने के लिए  वे अपने सहयोगियों को बार-बार फोन कर जुगाड़ लगाने में लगे हुए हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार की रात्रि 12 बजे से ही पांच सौ एवं एक हजार रुपये के नोट बंद करने के आदेश जारी कर दिए। हालांकि इसके बैंक से कुछ रुपये बदलने तथा अपने बैंक खातों में पैसा जमा करवाने की उन्होंने लोगों को छूट दे दी है।

हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इरादे पहले ही स्पष्ट कर दिए थे कि वे भ्रष्ट्राचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगें। लेकिन फिर भी काफी अधिकारी एवं व्यापारी ऐसे हैं जिनकी आखें नहीं खुली।
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लेकिन फिर भी जिन लोगों के पास  काफी ज्यादा ब्लैक मनी जमा है उनकी तो सांसे उखड़ने लगी हैं । अब इस काले धन को बैंक में जमा करवाएं तो इंकम टैक्स के अधिकारी उनकी बखिया उधेडेंगें।

यदि घर पर रखें तो इन नोटों की रद्दी हो जाएगी। करें तो क्या करें । पूरा रात ऐसे लोगों की करवट बदलते ही गुजर गई। कुछ का बीपी हाई हो गया तो कुछ को डाक्टरों की शरण में जाना पड़ा।

नोटों के बंडल रिश्वत में लेने वाले अधिकारियों से जहां लोग उनको बाबूजी व सर कहकर बुलाते थे अब यही अधिकारी इस काले धन को छुपाने व नोटों को बदलवाने के लिए लोगों से सर व बाबूजी कह रहे हैं । काले धन को छिपाने के लिए ऐसे लोग सभी हथकंडे अपना रहे हैं लेकिन देखना यह है कि ये  इस मिशन में कामयाब हो जाएंगें या फिर मोदीजी के मिशन मे फंस जाएंगे।

सुबह से ही दुकानदार व ग्राहकों में होने लगी तकरार

- फोटो : अमर उजाला
जिन परिवारों के घर में टीवी नहीं हैं और या फिर लोग जल्द ही सो गये। उनके लिये बुधवार का दिन अच्छा नहीं रहा। मेवात इलाके के पुन्हाना क्षेत्र में आज सारे दिन लोग एक दूसरे से झगडते ही नजर आये तो बहुत से दुकानदारों ने अपनी दुकान बंद रखने में ही गनीमत समझी।

पांच सौं और एक हजार के नोट बंद होने कि सूचने से बुधवार को सारे दिन अफरा तफरी ही मची रही। ये अफरातफरी सूबेह सो कर खडे होने के साथ ही शुरू हो गई थी। सबसे पहले नजारा गांव लाहाबास में देखने को मिला जहां किराने की दुकान पर एक महिला को दुकानदार से झगडते हुऐ देखा गया।

महिला के हाथ में पांच सौ का नोट था, वह दुकान से चाय पत्ती, चीनी, दूध और मटठी खरीदने के लिये आई हुई थी। दुकानदार ने सामान देने से मना कर दिया और कहा कि अगर सौ-सौ के नोट हो तो सामान मिलेगा। मोदी ने पांच सौ और हजार के नोट बंद कर दिये हैं।

नोट बंद होने पर महिला और ज्यादा गुस्से में आ गई और कहने लगी कि रात को ही मेरे बेटे ने सूबेह के नास्ते का सामान लाने के लिये 500 रूपये दिये थे और अब कहते हो बंद हो गये हैं।

- फोटो : अमर उजाला
एक किराने कि दुकान पर ही नहीं बल्कि बाजार में खोमचा, केला, सब्जी और मूंगफली आदी सामान बैचने वालों ने भी पांच सौं और हजार का नोट लेने से साफ मना कर दिया। इतना ही नहीं कस्बा पिनगवां में तो अधिक्तर सर्राफों ने अपनी दुकाने तो खोली लेकिन कोई लेना देना नहीं किया।

इसके अलावा अपने मकान बनाने के लिये गाटर, पत्थर  और सिमिंट कि दुकानों पर सामान खरीने पहुंचे ग्रामीण से कुछ दुकानदारों ने करीब 12 बजे तक तो सामान दिया लेकिन जब उनके अन्य साथियों ने अपनी दुकानें बंद रखी तो उन्होने भी पांच सौं और हजार के नोटों के बदल कोई भी सामान देने से इंकार कर दिया।

कस्ब पिनगवां में सिमिट, गाटर और पत्थर बैचने का काम करने वाले महेश ने बताया कि दोपहर तक तो उन्होने पांच सौं और हजार के नोटों बदले सामान ाब दिया लेकिन जब उनके अन्य साथियो ने ऐसा नहीं किया तो उन्होने भी लेना-देना बंद कर दिया।

पिनगवां में रेहडी पर मूंगफली बैचने वाले सलीम और कैला बैचने वाले मकसूद का कहना है कि उन्होने रात को टीवी पर प्रधान मंत्री मोदी को सुना था कि उसने कहा कि मंगलवार कि रात 12 बजे के बाद पांच सौं और हजार के नोट कागज के टुकडे बन जाऐगें।

- फोटो : अमर उजाला
उन्होने कहा कि जब ये कागज के टुकडे बन गये हैं तो उनके लेने का क्या फायदा। वे सौ-पचास रूपये दिन में कमाते हैं अगर एक पांच सौ का नोट नहीं चला तो उसकी तो सारी मेहनत कि जाती रहेगी। इस लिये उसने ने लेने में ही गनीमत समझी।

फाता बी का कहना है कि वह अनपढ़ है और परिवार में कोई भी पढ़ा लिखा नहीं हैं। वह मंगलवार कि शाम जल्द ही सो गई थी। वह सूबेह जब नास्ता का सामान लेने के लिये पडौस के ही किराना की दुकान पर गई तो उसने पांच सौ का नोट लेने से मना कर दिया कहा कि ताई ये नोट अब बंद हो गये है।

जिसकी वजह से दुकानदार ने उधार तो सामान दे दिया लेकिन पांच सौ का नोट लेने से मना कर दिया। फतेह मोहम्मद ने बताया कि वह नूंह से गांव लाहाबास आ रहा था। उसका बेटा हसन खां मेडिकल कॉलेज में भर्ती था। वह उसको मोटरसाईकल से ला रहा था, रास्ते में कई पैट्रोल मिले उन्होने तीन सौ रूपये का पैट्रोल डलवाना चाहा लेकिन उन्होने पांच सौ से कम पैट्रोल डालने से मना कर दिया।

कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष आफताब अहमद का कहना है कि सरकार का कदम तो अच्छा है लेकिन ये सब सरकार ने जल्दबाजी और बिना तैयारी के शुरू किया है। जिसकी वजह से आम जनता को भारी परेशानी हो रही है।

उन्होने कहा कि आज कल शादियों का सीजन चल रहा है और किसानों कि खेती का काम है, ऐसे में अचानक पांच सौ और एक हजार के नोट बंद कर भाजपा कि अनुभवहीन सरकार ने आम जनता को परेशानी में डाल दिया है।
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बड़े नोटो के बंद होने से मची अफरा तफरी

मगंलवार देर शाम एक हजार व पांच सौ के पुराने नोटो के बंद होने की खबर जैसे ही लोगों को लगी तो लोगों में अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया।  लोंग रात 12 बजे तक विभिन्न एटीएम पर पहुंच राशी जमा कराने व निकासी करते देखे गए।

इस फैंसले से  जहां कुछ लोग संतुष्ट नजर आये तो कुछ लोग इसे लोगों को परेशान करने का कारण बता रहे थे। बुधवार को बैंक व एटीएम बंद रहने के कारण लोग इधर उधर भटकते रहे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार शाम जैसे ही इस ऐतिहासिक फैंसले का ऐलान किया तो कस्बे के एटीएम पर लोगों का ह्रूजूम उमड़ पड़ा। देर रात तक लोग एटीएम पर लाईन लगाकर खड़े रहे।

एटीएम उपभोक्ता अनील, सतीश, मौ0 हाशिम, नुरदीन, मेहन्द्र, टीटू आदि ने बताया की  एक हजार व पांच सौ के पुराने नोटो के बंद होने की सूचना के बाद एटीएम पर लंबी लाईन लग गई। करीबन  दो घंटे से वह भी लाईन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे।

कुछ एटीएम उपभोक्ताओं ने बताया की वह हजार व पांच के नोट जमा करकर 400-400 रूपये निकाल रहे है। ताकि आगामी दो दिनों तक एटीएम बंद व बैंक बंद होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़ा।

इस फैंसले से जहां कुछ लोग संतुष्ट थे, वहीं कुछ इसे पचा नहीं  पा रहे थे।  वहीं बुधवार को एटीएम व बैंक बंद रहने के कारण उपभोक्ता इधर उधर भटकते देखे गए।
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