बीपीओ और आईटी हब के लिए मशहूर गुरुग्राम काले धन का गढ़ है। प्रॉपर्टी के कारोबार के जरिये यहां सबसे अधिक काले धन की खपत हो रही है। अब 500 व 1000 की नोट की पाबंदी के बाद काले धन की खपत पर रोक लगने की उम्मीद है। वहीं, काले धन के जरिये प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोग इससे चिंतित हैं। उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है।
भ्रष्टाचार और काले धन पर लगाम लगाने के लिए 500 व 1000 के नोट पर पाबंदी की बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधित करते हुए कहा था कि प्रॉपर्टी के कारोबार में सबसे अधिक काले धन का इस्तेमाल होता है। प्रधानमंत्री ने भी स्वीकार किया था कि जितने की प्रॉपटी होती है।
उसका कुछ हिस्सा सफेद होता है और बाकी काला धन। वहीं, सूत्रों की मानें तो साइबर सिटी के प्रॉपर्टी कारोबार में अथाह काला धन खप रहा है। शहर के गली-कूचों तक प्रॉपर्टी कारोबार का धंधा फल-फूलफूल रहा है।
कैसे खपाया जाता है काला धन
गुड़गांव
नाम नहीं छापने की शर्त पर सोहना रोड स्थित एक प्रॉपर्टी डीलर ने साफ तौर पर कहा कि गुरुग्राम में सभी प्रॉपर्टी सर्कल रेट से नहीं बिकते हैं। लोकेशन और खरीददार की हैसियत से दाम तय होता है।
सर्कल रेट के हिसाब से प्रॉपर्टी का जितना रेट होता है, उसका तो डीडी देना होता है। जो पूरी तरह से सफेद धन है। इसके बाद जो राशि बचती है उसका पेमेंट नकद में करना होता है, जिसका कोई लेखा जोखा नहीं होता है। यह खरीदार और डीलर के बीच तय होता है।
प्रॉपर्टी लेनदेन में जो काला धन इस्तेमाल होता है। उसे खुदरा बाजार में खपाया जाता है। इसमें प्रॉपर्टी रजिस्ट्री में रिश्वत से लेकर बजरी, ईंट, सरिया, ठेका मजदूर को देकर खुले बाजार में खपाया जाता है। खुले बाजार में जाने के बाद यह सफेद धन हो जाता है।
करीब 8000 है प्रॉपर्टी डीलर
gurgaon
- फोटो : अमर उजाला
अनुमान के मुताबिक गुरुग्राम में प्रॉपर्टी डीलरों की संख्या तकरीबन आठ हजार है। नियमों के मुताबिक प्रॉपर्टी कारोबार में लगे डीलरों का जिला प्रशासन के यहां रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है।
गुरुग्राम में रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी डीलरों की संख्या 1,200 के आसपास है। जिला प्रशासन को भी पंजीकृत प्रापर्टी डीलरों की आधिकारिक संख्या का पता नहीं है। आरटीआई एक्टिविस्ट रविंद्र बत्रा कहते हैं कि प्रॉपर्टी के खरीद में ब्लैक मनी का उपयोग बहुत ज्यादा होता है। मगर इस पर निगाहबानी का कोई जरिया नहीं है।
वाड्रा मामला भी कुछ ऐसा ही
गुरुग्राम के प्रॉपर्टी के मामले हमेशा से विवाद का विषय रहे हैं। राबर्ट वाड्रा मामला भी तकरीबन इसी प्रकार का था। वाड्रा पर आरोप है कि उन्होंने किसानों की जमीन सस्ते रेट पर लेकर सीएलयू कराया और बाद में उसे महंगे रेट पर बेच दिया। प्रॉपर्टी के जानकारों का कहना है कि यह भी काले धन को संरक्षित करने जैसा ही मामला है।