गाजियाबाद में रहने वाले लोगों को जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। नगर निगम ने एक साथ हाउस टैक्स दरों में 25 फीसदी की बढ़ोतरी कर लोगों पर बोझ डाल दिया। हालांकि यह बढ़ोतरी 14 साल बाद की गई है, लेकिन एक साथ इतनी बड़ी बढ़ोतरी को लोग नगर निगम की मनमानी मान रहे हैं।
इससे पहले नगर निगम ने वर्ष 2001 में हाउस टैक्स के रेट रिवाइज किए थे। दूसरी ओर, नगर निगम गंगाजल की आपूर्ति वाले क्षेत्रों और पानी का कामर्शियल यूज करने वालों से यूजर चार्ज भी वसूलेगा।
ऐसे में टीएचए में रहने वालों पर दोहरी मार पड़ेगी। सोमवार को हुई नगर निगम की कार्यकारिणी समिति की बैठक में इन प्रस्तावों पर सहमति की मुहर लग गई है।
14 साल बाद क्यों हुआ ये फैसला?
महापौर तेलूराम कांबोज की अध्यक्षता में शुरू हुई कार्यकारिणी बैठक की शुरुआत हंगामेदार रही। एक ही जमीन को दो उपयोगों के लिए आवंटित किए जाने पर बैठक का माहौल गर्म हो गया।
हाउस टैक्स बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर भी अधिकांश पार्षदों ने विरोध किया। निगम अधिकारियों के समझाने और 14 साल से हाउस टैक्स न बढ़ने से घाटे में जा रहे नगर निगम को उबारने के लिए फिलहाल 25 फीसदी हाउस टैक्स बढ़ाने का निर्णय लिया। यह चालू वित्तीय वर्ष से ही लागू हो जाएगा।
निगम ने जीडीए को दिया करारा जवाब
मेट्रो फंड में हिस्सेदारी का भुगतान किए जाने के लिए बार-बार रिमाइंडर जारी कर रहे जीडीए को नगर निगम ने करारा जवाब दिया है। कार्यकारिणी समिति ने जमीनों की रकम का भुगतान मिले बिना मेट्रों को फंड दिए जाने से साफ इनकार कर दिया है।
कार्यकारिणी समिति का कहना है कि जीडीए पहले जमीनों की रकम का भुगतान करें और तक पैसा मांगे। निगम ने मेट्रो यार्ड के लिए किराए पर मांगी जा रही 10 हेक्टेयर जमीन देने से भी इनकार कर दिया।
कार्यकारिणी समिति के उपाध्यक्ष राजेंद्र त्यागी का कहना है कि महामाया स्टेडियम के पीछे खाली पड़ी जमीन सिटी फॉरेस्ट की है। इस पर हाईकोर्ट का स्टे है।
पावर स्टेशनों को जमीन नहीं
जीडीए कालोनियों में नगर निगम बिजलीघरों के लिए जमीन नहीं देगा। निगम पार्षदों का कहना है कि शालीमार गार्डन, राजेंद्र नगर कालोनियां जीडीए ने बसाई है। बिजली घर और सामुदायिक सुविधाओं के लिए जमीन देने का दायित्व जीडीए का है।
करहेड़ा को जमीन देने पर निगम राजी हो गया है। पार्षदों का कहना है कि अगर जीडीए के पास जमीन नहीं है तो डीएम सर्किल रेट पर निगम से जमीन लेकर बिजलीघर का निर्माण कराए।
गोल्फ लिंक की सीवर लाइन के काम पर निगम रोक लगाएगा। दरअसल, सीवर लाइन की अनुमति निगम के जलकल विभाग ने जारी ही नहीं की। बिल्डर ने जोनल अधिकारी से गुपचुप स्वीकृति लेकर लाइन डालने का काम शुरू कर दिया। कार्यकारिणी समिति ने वह अनुमति भी निरस्त कर दी है।
2100 दुकानों की पत्रावलियां गायब
नगर निगम की 2100 दुकानों की पत्रावलियां गायब हो गई है। शिकमी दुकानदारों (मूल आवंटी से संपत्ति किराए पर लेने वाले) का रिकार्ड में नामांतरण करने की कार्रवाई का प्रस्ताव कार्यकारिणी बैठक में रखा गया। पार्षद राजेंद्र त्यागी ने दुकानों की पत्रावलियां और एग्रीमेंट प्रस्तुत करने को कहा तो पता चला कि दुकानों की पत्रावलियां ही गायब हो गई है। कार्यकारिणी ने दोषी बाबुओं और अधिकारी पर एफआईआर के निर्देश दिए हैं।
निगम में कमीशन का रेट बढ़ाए जाने का मुद्दा भी गूंजा। निगम पार्षद राजेंद्र त्यागी ने कहा कि निर्माण विभाग के जेई अब 5 फीसदी कमीशन लेने लगे हैं। जलकल और उद्यान विभाग में चार से बढ़कर कमीशन छह फीसदी हो गया है। पार्षदों ने नगर आयुक्त एसके सिंह से जवाब मांगा। नगर आयुक्त ने मामले की जांच का औपचारिक आश्वासन देकर मामले को रफा-दफा किया।
निर्माण विभाग ने प्राइवेट बिल्डर की कालोनी पार्श्वनाथ पैराडाइज में लाखों का प्रस्ताव पास कर दिया। एक साल पहले निगम एक बार काम भी करा चुका है। नगर आयुक्त ने बैठक में ही चीफ इंजीनियर को फटकार लगाई।
निगम लाएगा अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम
गाजियाबाद नगर निगम जल्द ही अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम लाएगा। खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर निगम स्टूडियो अपार्टमेंट बनाएगा। इसके लिए निगम हुडको (हाउसिंग एंड अरबन डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड) से सस्ते ब्याज पर लोन लेगा।
सोमवार को नगर निगम कार्यकारिणी समिति की बैठक में प्रस्ताव पास होने के बाद निगम का प्रापर्टी डिपार्टमेंट शहर की प्राइम लोकेशन की एलएमसी जमीनों को चिह्नित करने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले नगर निगम, जीडीए के साथ मिलकर हाउसिंग स्कीम लाने की तैयारी कर रहा था। लेकिन अब निगम खुद अपने बूते पर सस्ते मकान बनाकर देगा।
इन स्थानों पर आ सकती है हाउसिंग स्कीम
अकबरपुर-बहरामपुर, नूरनगर-सिहानी, महरौली, डूंडाहेड़ा, अर्थला
जनता पर कितना बढ़ेगा बोझ
अब 60 पैसे, 75 पैसे और 90 पैसे प्रति वर्ग फीट की बजाय 75 पैसे, 93 पैसे और 1.12 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से टैक्स देना पड़ेगा। जिस प्रापर्टी का टैक्स पहले 10 हजार रुपये सालाना था अब बढ़कर साढ़े 12 हजार रुपये सालाना हो जाएगा। वर्ष 2001 से पहले शहर में हाउस टैक्स की दरें महज 20 पैसे, 40 पैसे और 60 पैसे प्रति वर्ग फीट थी। हर साल टैक्स की दरों में स्वत: ही 5 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी जाएगी।
गंगाजल की एवज में जल निगम को आठ करोड़ रुपये का भुगतान न कर पा रहा निगम गंगाजल पीने वालों से यूजर चार्ज लेगा। चार्ज कितना होगा इस पर अंतिम निर्णय शासन से होगा। पानी का कामर्शियल इस्तेमाल करने वालों पर भी यूजर चार्ज लगाएगा।
निगम महानगर की सीमा में आने वाले ग्रामीण वार्ड और अनियमित कालोनियों पर भी टैक्स लगाएगा। बैठक में नगर आयुक्त एसके सिंह, कार्यकारिणी उपाध्यक्ष राजेंद्र त्यागी, पार्षद सत्यपाल यादव, प्रवीन चौधरी, आदिल मलिक , बाला यादव, अनिल चौधरी, संजय कुमार समेत अधिकारी रहे।
महत्वपूर्ण निर्णय
•पार्षदों को 10 हजार रुपये महीना मिलेगा वाहन भत्ता
•बिल्डर को दी 5270 वर्ग मीटर भूमि वापस लेगा निगम
•मोक्ष स्थली का कायाकल्प, बनेगा पीएनजी शवदाह गृह
•नूरनगर में आयुर्वेदिक अस्पताल को जगह देगा निगम
•मेडिकल संस्था नीमा के साथ मिलकर खोलेगा पंचकर्म केंद्र
•इंदिरापुरम के एसटीपी टेकओवर नहीं करेगा निगम
•अर्थला झील के चारों ओर सड़क बनाने पर जीडीए को नहीं दी एनओसी
•क्रिश्चयन समाज व लावारिस शवों को दफनाने के लिए बनेगा कब्रिस्तान
•रमतेराम रोड कामर्शियल कांप्लेक्स के एक्सटेंशन पर लगाई रोक