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अटाली : मालिक की बाट जोह रहे मकान

Sun, 19 Jul 2015 07:10 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद
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गलियों में सन्नाटा, खाली सड़कें, मालिक की बाट जोहते मकान..। लगभग नौ हजार की आबादी वाले गांव आदर्श गांव अटाली का यही हाल है। दो बार हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद गांव में एक समुदाय के 300-400 लोग रह गए हैं और दूसरे समुदाय के 70 परिवारों के घरों में ताले लटके हुए हैं।
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लगभग दो माह से चले आ रहे इस तनाव ने अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों दोनों का नुकसान किया है। दोनों हारे हैं। जीते हैं तो सिर्फ नफरत फैलाने वाले। ऐसे में अब गांव के दोनों समुदायों की ओर से सुलह की मांग उठने लगी है। एक समुदाय चाहता है कि सुरक्षाकर्मी गांव से लौट जाएं तो दूसरा समुदाय अपने गांव वापस लौटना चाहता है। आखिर कब तक रहेंगे रिश्तेदारियों में।

विवादित जमीन पर धर्मस्थल निर्माण को लेकर 25 मई को यह गांव दंगे की आग में जल उठा। एक समुदाय के लोग गांव से भाग खड़े हुए। गांव के बाहर जाकर थाने में बनाए गए राहत शिविर में शरण ली। वे फिर गांव लौटे, लेकिन पहली जुलाई की दोपहर फिर तनाव बढ़ गया।
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चार जुलाई को पुलिस की कार्रवाई में करीब 72 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें से नौ अब भी पुलिस की गिरफ्त में हैं। ऐसे में पुलिस कार्रवाई के डर से बहुसंख्यक समुदाय के भी कई लोगों ने गांव के बाहर शरण ले रखी है। क्योंकि उन्हें पुलिस कार्रवाई का खौफ है।

दंगे के बाद उपजी स्थितियों से आम लोगों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ा है। किसान धर्मपाल जहां खेतों पर मजदूरों के न आने से दुखी हैं। वहीं, जसवंत अपनी सब्जियां न बेच पाने से परेशान। उनका कहना है कि पिछले चार-पांच दिनों में उन्हें 50 हजार रुपये का नुकसान हो गया है।

उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई के बाद गांव से बाहर निकलने से डर लग रहा है। कब हमें पुलिस पकड़ ले। हम गांव से बाहर बल्लभगढ़ नहीं जा पा रहे। सब्जियां खेतों में ही सड़ रही हैं। गांव में मौजूद लोग पुलिस के रवैये से नाराज हैं। सौदान सूबेदार का कहना है कि दंगे से ज्यादा लोगों में पुलिस की कार्रवाई का खौफ है।

एसीपी विष्णु दयाल से जब पूछा गया कि ग्रामीण उन पर जबरदस्ती करने का आरोप क्यों लगा रहे हैं तो उन्होंने कहा कि पुलिस तो उनका सहयोग करना चाहती है। लेकिन वे सुनने को तैयार नहीं हैं।

सरकारी हाईस्कूल के पास बसी कॉलोनी निवासी नूर मोहम्मद ने बताया कि हम सभी हंसी-खुशी साथ रह रहे थे। लेकिन धर्मस्थल निर्माण लेकर हुए बवाल ने सब कुछ बदल कर रख दिया। पुलिस ने हमारी मदद की, लेकिन हम कब तक अपने घरों से दूर भटकते रहेंगे। रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। दो महीने से काम ठप है। इसलिए मुद्दे का समाधान होना चाहिए।
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