उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच ओम प्रकाश चौटाला पैरोल मामले में दोतरफा वार शुरू हो गया है। गृहमंत्री व मुख्यमंत्री ने पैरोल के लिए उपराज्यपाल की तरफ से दबाव डालने का बयान आया तो अब राजनिवास भी खुलकर सामने आ गया।
उपराज्यपाल के ओएसडी अजय चौधरी ने कहा गृहमंत्री सत्येंद्र जैन मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री समेत आप नेताओं का मुकदमा वापस कराने केम लिए ओम प्रकाश चौटाला मामले को राजनैतिक रंग देकर उपराज्यपाल पर असफल दबाव की कोशिश कर रहे हैं।
पहली बार 11 सितंबर और फिर 21 सितंबर को अपने साथ एक फाइल लेकर आए थे। उसमें मुख्यमंत्री पर रेल भवन धरना समेत 24 केस वापस लिए जाने की सिफारिश पर तुरंत मुहर लगवाना चाहते थे, लेकिन उपराज्यपाल ने मुकदमे वापस लेने की सिफारिश पर मुहर नहीं लगाई है।
फैसले के अधिकार राजभवन को
राजनिवास सचिवालय के साथी अधिकारियों की मौजूदगी में अजय चौधरी ने कहा कि ओम प्रकाश चौटाला की तरफ से आया पहला पैरोल आवेदन 5 अक्तूबर को रिजेक्ट किया गया। फिर 28 अक्तूबर को दिल्ली सरकार से मुख्यमंत्री के आरोप वाली फाइल नोटिंग के साथ नए आवेदन की फाइल मिली।
गृहमंत्री पर दबाव डालने का आरोप पूरी तरह असत्य हैं। राजनैतिक लाभ के लिए आपराधिक न्याय प्रणाली को विकृत करने की कोशिश की गई है। उपराज्यपाल ने अभी चौटाला पैरोल पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
मामले पर विचार करके योग्यता एवं कानून के अनुसार स्वीकार या अस्वीकार किया जाएगा। यह भी स्पष्ट किया है कि पैरोल आवेदन को स्वीकार करना या अस्वीकार करना उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र का मामला है।
सिफारिश के साथ आया था आवेदन
उपराज्यपाल ओएसडी ने यह भी साफ किया है कि ओम प्रकाश चौटाला के बेटे अजय चौटाला की पैरोल के लिए एम्स के 11 डॉक्टर की सिफारिश के साथ आवेदन आया था। उस आवेदन में 28 अगस्त की मेडिकल रिपोर्ट लगी थी जिसे 26 अक्तूबर को रिजेक्ट कर दिया है।
वहीं, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके उपराज्यपाल पर तथ्य छिपाने, ओम प्रकाश चौटाला की पैरोल के लिए दबाव बनाने का आरोप फिर से लगाया है।
वहीं नेताओं पर चलने वाले मुकदमा वापस लेने के लिए डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की अगुवाई में जिला स्तर पर कमेटी गठित करने के प्रस्ताव का ऐलान भी किया है। इसमें डीएम, डीसीपी, चीफ प्रॉसिक्यूटर और एसडीएम मुख्यालय शामिल होंगे।