फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जमकर होली खेलें, मगर संभलकर

Thu, 05 Mar 2015 07:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
फरीदाबाद में फाल्गुन का महीना हो और चारों ओर बृज के गीतों व रसिया का आनंद लिया जा रहा हो तो ऐसे में आप भी खुद को दोस्तों के संग होली के रंग में रंगने से नहीं रोक पाएंगे।
विज्ञापन


लेकिन होली कहीं आपके रंग में भंग न डाल दे, इसका भी आप ख्याल रखें। इस त्योहार का आनंद सुरक्षित तरीके से लेने के लिए खाने-पीने से लेकर रंग तक में सावधानियां बरतना न भूलें। सुरक्षित होली कैसे मनाएं, इसे लेकर अमर उजाला ने शहर के फिजिशियन और नेत्र रोग विशेषज्ञ से बातचीत की।

फिजिशियन डॉ. सुरेंद्र दत्ता के मुताबिक संभव हो तो फूलों से होली खेलें। ऐसा न हो सके तो हर्बल रंग का इस्तेमाल करें। होली खेलते समय ऐसे कपड़े पहने, जिनसे आपका शरीर अच्छी तरह से ढक जाए। सनक्रीम, बेबी ऑयल या बादाम तेल अपने पूरे शरीर पर अच्छी तरह लगा लें। इससे आपकी त्वचा पर रंगों का सीधा असर नहीं होगा।
विज्ञापन


यदि रंगाें से चकत्ते, खुजली या कोई रिएक्शन हो तो तुरंत चिकित्सक से बात करें। केरोसीन, पेट्रोल और स्प्रिट आदि का इस्तेमाल धब्बों को हटाने के लिए नहीं करें क्योंकि इससे त्वचा में अधिक सूखापन होगा। उधर, ज्यादातर मिठाई मिलावटी आ रही हैं इसलिए खासतौर पर मावा वाली मिठाई खाते समय ध्यान रखें।

नेत्र रोग विशेष डॉ. अरविंद कुमार के मुताबिक रंग के आंखों में आने पर जलन, दर्द, सूजन और फोटोफोबिया (प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता) की शिकायत होती है। ऐसा होने पर सादे पानी से आंखों को अच्छी तरह धोएं, मलें नहीं। दूषित कपड़े हटा दें। यदि दिक्कत बनी रहे तो डॉक्टर को दिखाएं। आपकी आंखों में वाटर बैलून लग जाए तो आंखों को पानी से तुरंत धो लें।
विज्ञापन


-ग्रीन कॉपर सल्फेट से नेत्र एलर्जी, अस्थायी अंधापन की समस्या हो सकती है।
-सिल्वर एल्यूमिनियम ब्रोमाइड कैंसर जन्य होता है।
-लाल मर्करी सल्फेट बेहद जहरीला होता है और इससे त्वचा कैंसर हो सकता।
-रंग में क्रोमियम होने से ब्रोंकियल अस्थमा हो सकता है।
-रंग में पारा होने से डर्मेटाइटिस हो सकती है।
-काले लेड ऑक्साइड गुर्दे को खराब कर सकते हैं।
(चिकित्सकों के मुताबिक)

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें