इन ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण को लेकर तैयारियां चल रही हैं। कुछ में संरक्षण कार्य शुरू होने वाला है। इनका जल्द संरक्षण कार्य किया जाएगा। -प्रवीण सिंह, दिल्ली सर्कल चीफ व सुपरिटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट, एएसआई
इसी तरह लोदी गार्डन में स्थित सिकंदर लोदी का मकबरा, बड़ा गुंबद, शीश गुंबद के रखरखाव का अभाव है। इसकी टूटती दीवारें, महराब और कमजोर होती नींव बदहाली की कहानी कह रहे हैं। सैय्यद राजवंश के अंतिम शासक अला-उद-दीन आलम शाह द्वारा अपने पिता मोहम्मद शाह की कब्र यहां पर 1444 ई में बनाई गई थी। इसमें लोदी राजवंश से सिकंदर लोदी का मकबरा है, जिसे 1517 में उनके बेटे इब्राहिम लोदी ने बनाया था। इसी में बड़ी गुंबद है और पास में स्थित तीन गुंबदों वाली मस्जिद के द्वार के रूप में कार्य करती है। गुंबद और मस्जिद दोनों को इस जगह के तत्कालीन शासक सिकंदर लोदी द्वारा सन 1494 ईस्वी में बनवाया गया था।
मुगल शासकों द्वारा बनाई अंतिम धरोहर भी हो रही खंडहर
दक्षिणी दिल्ली में स्थित मुगल शासक बहादुर शाह जफर का ग्रीष्मकालीन जफर महल बदहाल है। इसकी संगमरमर के फूल की आकृतियां और महल पर बनीं विभिन्न नक्काशियां भी वक्त के साथ जर्जर होती जा रही हैं। यह मुगल शासकों की ओर से बनवाई गई अंतिम धरोहर है। इस महल का निर्माण सन 1820 में शाहजहां चतुर्थ के पोते अकबर शाह द्वितीय ने करवाया था, लेकिन इसका 1847-1857 के बीच जीर्णोद्धार बहादुर शाह जफर ने कराया था। साथ ही आखिरी मुगल बादशाह ने महल के बाहरी भाग में एक आलीशान दरवाजे का भी निर्माण करते हुए इसका भव्य विस्तार कराया था। यहां इतिहास में रुचि रखने वाले लोग व शोधार्थी घूमने आते हैं। यह लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से बना है। लगभग 50 फीट ऊंचा और 11 फीट 9 इंच चौड़ा द्वार है। यह तीन मंजिला है, जिसमें बंगाल के गुंबदों से ढंकी व उभरी हुई खिड़कियां हैं।