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Ecological Restoration: तीन दशक बाद चंदौली तक लौटी हिल्सा, गंगा की सेहत में सुधार; डॉल्फिन की संख्या भी बढ़ी

Fri, 14 Aug 2026 07:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

चंदौली के टांडा खुर्द के पास हिल्सा का मिलना इसलिए खास है क्योंकि समुद्र से नदियों में आकर प्रजनन करने वाली यह प्रवासी मछली लंबी दूरी तय करती है। 
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हिल्सा मछली। - फोटो : freepik
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विस्तार
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गंगा की ऊपरी धारा में करीब तीन दशक बाद हिल्सा मछली की वापसी नदी की सेहत में आ रहे सकारात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण संकेत है। चंदौली के टांडा खुर्द के पास हिल्सा का मिलना इसलिए खास है क्योंकि समुद्र से नदियों में आकर प्रजनन करने वाली यह प्रवासी मछली लंबी दूरी तय करती है। 

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इसके लिए नदी में पर्याप्त जलप्रवाह, बेहतर ऑक्सीजन, अनुकूल तापमान और सुरक्षित प्रवास मार्ग जरूरी होते हैं। ऐसे में चंदौली तक हिल्सा का पहुंचना बताता है कि गंगा के इस हिस्से की परिस्थितियां उसके लिए पहले की तुलना में अधिक अनुकूल हुई हैं। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट में भी दशकों बाद ऊपरी गंगा में हिल्सा की वापसी को नदी संरक्षण की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया है। 

हिल्सा बंगाल की खाड़ी से गंगा में प्रवेश करती है और प्रजनन के लिए नदी की धारा में ऊपर की ओर जाती है। वर्ष 1975 में फरक्का बैराज बनने के बाद उसके प्राकृतिक प्रवास मार्ग में बड़ा अवरोध आया और बैराज के ऊपर हिल्सा की उपलब्धता में भारी गिरावट हुई। ऐसे में तीन दशक बाद चंदौली तक इसकी वापसी गंगा के जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे बदलाव का अहम संकेत है। नदी का स्वास्थ्य केवल पानी में प्रदूषण की मात्रा से नहीं मापा जाता। वहां मौजूद मछलियों और अन्य जलीय जीवों की विविधता तथा उनका प्राकृतिक जीवन-चक्र भी नदी की सेहत के महत्वपूर्ण संकेतक हैं। 
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फरक्का के बाद आया बड़ा बदलाव
हिल्सा के लिए गंगा का प्राकृतिक प्रवाह बेहद महत्वपूर्ण है। फरक्का बैराज के निर्माण के बाद ऊपरी गंगा में इसके प्रवास पर गंभीर असर पड़ा। नदी में बने अवरोधों के अलावा प्रदूषण, जलप्रवाह में कमी और अत्यधिक मछली पकड़ने ने भी इसके जीवन-चक्र को प्रभावित किया। अब इसकी वापसी से उम्मीद जगी है कि संरक्षण उपायों और नदी के बेहतर प्रबंधन से प्रवासी जलीय प्रजातियों के लिए परिस्थितियां फिर सुधर सकती हैं।

डॉल्फिन की संख्या भी बढ़ी
गंगा के पारिस्थितिक सुधार का एक और महत्वपूर्ण संकेत गंगा डॉल्फिन की बढ़ती संख्या है। इनकी संख्या बढ़कर 6327 हो गई है। साथ ही गंगा के प्रदूषित हिस्सों में भी उल्लेखनीय कमी आई है। 

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