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जनकपुरी हादसा: ठेकेदारों की अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

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अमर उजाला ब्यूरो
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को जनकपुरी में एक गहरे गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय बाइक सवार की मौत के मामले में दो ठेकेदारों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने टिप्पणी की कि सार्वजनिक सड़कों को मौत के जाल में तब्दील नहीं होने दिया जा सकता। अदालत ने ठेकेदार हिमांशु गुप्ता और कविश गुप्ता की जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि अनुबंध के अनुसार दोनों ठेकेदारों का कर्तव्य था कि कार्यस्थल पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
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इसमें यदि कोई व्यक्ति या वाहन गड्ढे में गिर जाए तो बचाव उपकरण उपलब्ध हो, प्राथमिक चिकित्सा सुविधा हो और पुलिस तथा चिकित्सा अधिकारियों को तुरंत सूचना दी जाए। न्यायाधीश ने अवलोकन किया कि व्यस्त सड़क के बीचों-बीच लगभग 20 फीट लंबा, 13 फीट चौड़ा और 14 फीट गहरा गड्ढा बिना किसी ब्लिंकर, बैरिकेड या सुरक्षा उपायों के खोदा गया था, जो कार्य अनुमति, टेंडर शर्तों और ट्रैफिक पुलिस की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन था। यह हादसा 5-6 फरवरी की दरमियानी रात को हुआ, जब रोहिणी में एक निजी बैंक में कार्यरत 25 वर्षीय कमल ध्यानी अपनी बाइक से घर लौट रहे थे। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) द्वारा सीवर कार्य के लिए खोदे गए खुले गड्ढे में बाइक गिर गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। ठेकेदारों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था।
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