जस्टिस विभू बाखरू ने कहा एलआईसी यह कहकर प्रीमियम में छूट देने से नहीं बच सकती कि अब याची साक्षी मिश्रा के पिता की मौत के बाद उसकी मां उसकी अभिभावक हैं। एलआईसी ने खुद याची की मां को कानूनी रूप से अभिभावक बनाने के लिए 13 दिसंबर 2010 को बुलाया था। अदालत ने कहा कि याची की मां पुरानी पॉलिसी को चालू करने गई थी न कि नई पॉलिसी खरीदने के लिए। इस पॉलिसी को पुरानी शर्तों पर ही चालू किया जाना था। इसके मुताबिक, याची के पिता की मौत के बाद प्रीमियम नहीं दिया जाना था। याचिका पर सुनवाई के दौरान एलआईसी के वकील ने कहा कि पुरानी पॉलिसी चालू नहीं की गई थी, बल्कि नई पॉलिसी शुरू की गई । इसलिए इस पॉलिसी पर प्रीमियम का भुगतान करना होगा। इसके अलावा कोर्ट को यह मामला सुनने का अधिकार नहीं था। कोर्ट ने इन दोनों दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया।