जिलाधिकारी बीएन सिंह ने बताया कि शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी दाखिले में 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब कोटे (ईडब्ल्यूएस) के तहत बच्चों का दाखिला करना है। इस आधार पर अभिभावकों ने दाखिले के लिए आवेदन किया। इसके बाद दाखिले भी हो गए। बाद में जब ऐसे अभिभावकों की जांच बेसिक शिक्षा अधिकारी से कराई गई तो उनमें से नौ के खिलाफ मामला उलटा निकलकर सामने आ गया। जांच में पता चला कि ऐसे बच्चों के अभिभावकों ने फर्जी आय प्रमाण पत्र बनवाकर उसमें अपने आप को एक लाख रुपये प्रति वर्ष तक आय होने की बात दिखाई। इसी आधार पर दाखिला होना था।
जांच में पता चला कि इनकी आय इससे काफी अधिक है। जांच के बाद छपरौली बांगर निवासी सुनील चौहान के खिलाफ विभाग ने मामला दर्ज कराया है। इसके अलावा बरौला निवासी अमर कुमार रावत, कादलपुर निवासी शकील, रौनीजा के मुकेश कुमार और भाईपुर ब्रह्मनानपुर के कौशल शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। इन्होंने फर्जी आय प्रमाण पत्र के आधार पर बच्चों का दाखिला स्कूलों में करा लिया था। वहीं, सेक्टर- 8 निवासी सरोज कुमार चौधरी, सेक्टर-20 के सचिन शर्मा, छपरौली बांगर के रोहित चौहान और योगेश कुमार ने बच्चों का प्रवेश नहीं कराया। जिलाधिकारी का कहना है कि फर्जीवाड़ा कर ईडब्ल्यूएस कोटे में दाखिला कराने वाले अभिभावकों को चेतावनी दी जा रही है कि पकड़े जाने पर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग कड़ी कार्रवाई करेगा।