दिल्ली के दंगल में दिग्गजों की सीटों में से केवल मंत्री इमरान हुसैन को छोड़ सभी की सीटों पर 2015 की तुलना में इस बार कम मतदान हुआ। मुख्य निर्वाचन कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सीट नई दिल्ली में वोटिंग में करीब 12 फीसदी की गिरावट हुई है।
नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में इस बार 1.45 लाख मतदाताओं में से 52.15 फीसदी ने ही वोट दिया। जबकि 2015 में यहां 64.72 फीसदी मतदान हुआ था और अरविंद केजरीवाल ने 31583 वोट के अंतर से रिकॉर्ड जीत हासिल की थी। ठीक इसी तरह उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की सीट पटपड़गंज में 65.48 फीसदी था।
मॉडल टाउन में 59.35 फीसदी मतदान हुआ। इस सीट से भाजपा से कपिल मिश्रा चुनाव लड़ रहे हैं। 2015 में भाजपा ने इस सीट पर विवेक गर्ग को प्रत्याशी के रुप में उतारा था। तब कुल मतदान 67.88 फीसदी हुआ था। हालांकि यहां से जीत आप प्रत्याशी अखिलेश पति त्रिपाठी ने हासिल की थी जोकि इस बार भी चुनावी मैदान में हैं।
इन्हीं की तरह पूर्व मुख्यमंत्री के भाई मास्टर आजाद सिंह वर्मा चुनाव लड़ रहे हैं। बाहरी दिल्ली की सबसे अहम और हरियाणा बॉर्डर वाली सीट मुंडका से वे भाजपा प्रत्याशी हैं। 2015 में भी मास्टर आजाद सिंह वर्मा ने भाजपा की ओर से चुनाव लड़ा था। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस बार यहां भी 59.24 फीसदी मतदान हुआ है जबकि पिछली बार 63 फीसदी मतदान हुआ था।
अमानतुल्लाह की सीट पर कम मतदान
जामिया हिंसा को लेकर भाजपा के आरोपों का शिकार बने आप विधायक और वर्तमान प्रत्याशी अमानतुुल्लाह खान की सीट ओखला में भी मतदान कम हुआ है। शाहीन बाग इलाके में पिछले कई दिनों से सीएए और एनआरसी के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर ये सीट पूरे चुनाव में खासा सुर्खियों में भी रही। इस सीट पर 58.84 फीसदी मतदान हुआ है। जबकि 2015 में 60.94 फीसदी लोगों ने वोट किया था और अमानतुल्लाह को जीत हासिल हुई थी।